राजनीति में परिवारवाद-वंशवाद पर छिड़ी बहस बिहार विधानसभा चुनाव में और लंबी हो गई है। वाम दलों को छोड़ कर सभी दलों ने टिकट वितरण में दिल खोल कर नेताओं के रिश्तेदारों पर प्यार लुटाया है।
इस मामले में सबसे आगे जदयू के पूर्व सांसद अरुण कुमार और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के मुखिया जीतन राम मांझी हैं, जिनके परिवारों के तीन-तीन सदस्य चुनाव मैदान में हैं।
राजद, भाजपा, लोजपा आर, आरएलएम जैसे दलों ने भी वंशवाद की राजनीति से परहेज नहीं बरता है। हाल ही में जहानाबाद के पूर्व सांसद अरुण कुमार ने बेटे को टिकट की शर्त के बाद जदयू में घर वापसी की। उनके पुत्र ऋतुराज घोसी से जदयू के उम्मीदवार हैं। इसके अलावा उनके भाई अनिल कुमार टिकारी और भतीजे रोमित अतरी से हम के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
हम के मुखिया जीतन राम मांझी केंद्र सरकार और उनके पुत्र बिहार सरकार में मंत्री हैं। उन्होंने अपने हिस्से की छह में से तीन सीट रिश्तेदारों में बांट दीं। मांझी की पुत्रवधु दीपा कुमारी इमामगंज, समधन ज्योति देवी बाराचट्टी और दामाद प्रफुल्ल मांझी सिकंदरा से पार्टी के उम्मीदवार हैं। खुद राज्यसभा के सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री सह आरएलएम के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी पत्नी स्नेहलता को सासाराम से उम्मीदवार बनाया है।
सहनी ने भाजपा एमएलसी के बेटे को दिया टिकट
वंशवाद की राजनीति में कोई दल पीछे नहीं है। महागठबंधन में विकासशील इंसान पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी ने अपने भाई को उम्मीदवार बनाया है। कटिहार सीट से उन्होंने भाजपा के एमएलसी अशोक अग्रवाल के पुत्र को टिकट दे दिया है। वहीं, भाजपा ने पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्र, पूर्व सांसद दिग्विजय सिंह, पूर्व राज्यपाल गंगा प्रसाद के पुत्र क्रमश: नीतीश मिश्रा, श्रेयसी सिंह, संजीव चौरसिया, पूर्व विधायक नवीन नितिन प्रसाद के पुत्र नितिन नवीन को मौका दिया है। जदयू ने बाहुबली आनंद मोहन के पुत्र चेतन आनंद सहित आधा दर्जन नेताओं के रिश्तेदारों को उपकृत किया है।
राजद भी पीछे नहीं
लालू परिवार से वर्तमान में उनकी पत्नी राबड़ी देवी एमएलसी, पुत्री मीसा भारती सांसद, पुत्र तेजस्वी यादव और तेजप्रताप यादव विधायक हैं। इस चुनाव में राजद ने पूर्व बाहुबली सांसद शहाबुद्दीन के पुत्र ओसामा, पूर्व सीएम दारोगा प्रसाद राय की पोती करिश्मा राय और तेजस्वी यादव को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी से निष्कासित होने के बाद लालू के ज्येष्ठ पुत्र तेजप्रताप यादव अलग पार्टी बना कर मैदान में हैं। इसके अलावा राजद ने पूर्व सांसद शिवानंद तिवारी सहित कई नेताओं के पुत्रों को चुनाव में मौका उपलब्ध कराया है।