सिविल कोर्ट हाजीपुर ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव को गवाहों और सबूतों के आधार पर बरी कर दिया है। राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान जाति आधारित टिप्पणी करने और आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगा था।
2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान राजद प्रमुख ने एक सभा को संबोधित किया था। इस दौरान उन्होंने बैकवर्ड और फॉरवर्ड की लड़ाई की बात कही थी। लालू के इस बयान पर काफी विवाद हुआ था। मामला चुनाव आयोग तक पहुंचा। इसके बाद आयोग ने लालू यादव के बयान को आपत्तिजनक मानते हुए राघोपुर के तत्कालीन सीओ को उनके खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। लालू पर जातीय उन्माद फैलाने का आरोप लगा था।
मामले में बुधवार को लालू यादव सुनवाई के लिए हाजीपुर कोर्ट पहुंचे। इस दौरान वहां राजद समर्थकों की काफी भीड़ जमा हो गई। कोर्ट परिसर के बाहर लालू के समर्थन में नारेबाजी भी हुई। मामले की सुनवाई के दौरान सिविल कोर्ट ने गवाहों और सबूतों के आधार पर लालू यादव को बरी कर दिया।
इससे पहले लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिख रही हैं। राजद प्रमुख से जुड़े लोगों के ठिकानों पर बुधवार सुबह से सीबीआई की छापेमारी की। करीब 11 घंटे तक सीबीआई की टीम छापेमारी करती रही। छापेमारी नौकरी के बदले जमीन घोटाले को लेकर हो रही थी। इस घोटाले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी, बेटे और बिहार के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, सांसद बेटी मीसा भारती समेत लालू के कई करीबी फंसे हैं।