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बिहार: पूर्णिया में पीडीएस लाइसेंस आवंटन में फर्जीवाड़े का खुलासा, जांच के बाद एफआईआर और गिरफ्तारी

Sat, 03 Oct 2026 07:29 PM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया

सार

पूर्णिया के बनमनखी में 30 पीडीएस दुकानों के लाइसेंस आवंटन में कथित उगाही और फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। जांच के बाद प्रधान लिपिक अभिषेक कुमार राय, नाजिर कन्हैया झा और अमरेंद्र गुप्ता गिरफ्तार किए गए हैं। फर्जी डिग्री से अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है।

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गिरफ्तार बड़ा बाबू - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्णिया जिले के बनमनखी अनुमंडल कार्यालय में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों की अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) दिलाने के नाम पर कथित अवैध उगाही और फर्जीवाड़े के मामले का खुलासा हुआ है। जिलाधिकारी अंशुल कुमार के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय जांच टीम की रिपोर्ट में धांधली की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है।

जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) की तहरीर पर बनमनखी थाने में कांड संख्या 304/26 के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले में अनुमंडल कार्यालय के प्रधान लिपिक (बड़ा बाबू) अभिषेक कुमार राय, नाजिर कन्हैया झा और कथित तौर पर फर्जी डिग्री तैयार करने वाले अमरेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

अनुमंडल की 30 पीडीएस दुकानों के लाइसेंस आवंटन में अभ्यर्थियों से कथित भयादोहन और अवैध उगाही से जुड़े कई ऑडियो-वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने अपर समाहर्ता मुकेश कुमार मुकुल, डीएसओ रविशंकर उरांव और साइबर डीएसपी कनिष्क श्रीवास्तव की संयुक्त जांच टीम गठित की थी।

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जांच टीम ने उपलब्ध साक्ष्यों, प्रसारित ऑडियो-वीडियो क्लिप और पीड़ित अभ्यर्थियों के बयानों की जांच की। रिपोर्ट में धांधली की पुष्टि किए जाने के बाद डीएम ने एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए।

प्रसारित ऑडियो में प्रधान लिपिक अभिषेक कुमार राय पर आवेदकों से दो से तीन लाख रुपये मांगने और रकम नहीं देने पर दूसरे उम्मीदवार को दुकान आवंटित करने की धमकी देने का आरोप है। वहीं, नाजिर कन्हैया झा पर स्कैनर भेजकर 25 हजार रुपये मंगवाने का आरोप लगाया गया है।

मामले में अमरेंद्र गुप्ता को मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है। एक वीडियो में वह कथित तौर पर 21 अभ्यर्थियों के लिए बीए और एमए की फर्जी डिग्री तैयार करने की बात स्वीकार करते हुए दिखाई दे रहा है। बताया गया है कि ये प्रमाण पत्र उत्तर प्रदेश के संस्थानों के नाम से तैयार किए गए थे।

आरोप है कि इन्हीं फर्जी डिग्रियों के आधार पर अपात्र अभ्यर्थियों को मेधा सूची में क्रमांक एक पर स्थान दिलाया गया, जबकि वास्तविक मेधावी अभ्यर्थी पीछे रह गए। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सभी प्रमाण पत्रों की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक पीडीएस दुकानों के लाइसेंस निर्गत करने पर रोक लगाई जाए।

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