नेशनल हाईवे-31 पर बासगढ़ा के पास जो भयानक हादसा हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। सड़क पर बिखरी चूड़ियां, खून से सनी बच्चों की गुड़िया और अपनों को ढूंढते लोगों की चीखें यह साफ बता रही थीं कि यह कोई साधारण दुर्घटना नहीं, बल्कि सड़क पर हुआ एक बड़ा दर्दनाक हादसा था। 13 लोगों की मौत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह सिस्टम पर भी कई सवाल खड़े करता है, जहां नशे में धुत ड्राइवर खुलेआम तेज रफ्तार से मौत का खेल खेलता नजर आया।
गोगरी से शुरू होकर बना मौत का सफर
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार यह बस गेडाबाड़ी से निकलते ही खतरनाक हो गई थी। लोगों का कहना है कि बस कुछ ही दूरी में कई बार अनियंत्रित हुई। करीब 1.5 किलोमीटर के अंदर बस चार बार बेकाबू हुई। यात्रियों ने जब अपनी जान खतरे में देखी तो उन्होंने ड्राइवर से रफ्तार कम करने की गुहार लगाई, लेकिन ड्राइवर नशे और समय पर पहुंचने के दबाव में तेज रफ्तार में बस चलाता रहा और स्पीड 100 से ज्यादा पहुंच गई।
पहले बाइक सवार की मौत, फिर बड़ा हादसा
तेज रफ्तार का कहर ऐसा था कि बस ने पहले 40 साल के सदानंद मुर्मू नाम के बाइक सवार को टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद अनियंत्रित बस झारखंड के पचकठिया मेला से लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी पिकअप वैन से टकरा गई।
टक्कर इतनी जोरदार थी कि पिकअप वैन पूरी तरह पिचक गई, जैसे वह कागज की बनी हो। उसमें सवार 10 महिलाएं, 2 पुरुष और एक बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। बस और पिकअप में सवार लोगों की चीखें कुछ ही पल में हमेशा के लिए शांत हो गईं।
35 लोग थे पिकअप में सवार, उजड़ गए कई घर
जानकारी के अनुसार पिकअप वैन में झारखंड के पचकठिया मेला से लौट रहे करीब 35 लोग सवार थे। इनमें वे महिलाएं भी थीं जो घर लौटकर बच्चों को प्रसाद देने वाली थीं और वे बेटियां भी थीं जो मेले की यादें घर में सुनाने वाली थीं। लेकिन इस हादसे ने पूर्णिया के कई घरों के आंगन हमेशा के लिए सूने कर दिए।
ज्यादातर मृतक महिलाएं, गांवों में पसरा मातम
इस हादसे में 10 महिलाएं भी शामिल हैं, जो अपने परिवार और गांव की जिम्मेदारियां संभालती थीं। कुल 13 मृतकों में से 11 लोग पूर्णिया जिले के रहने वाले थे, जबकि 2 लोग कटिहार के थे। इस घटना ने एक बार फिर हाईवे पर तेज रफ्तार और नशे में ड्राइविंग की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है।
गांवों में मातम, चूल्हे तक नहीं जले
पूर्णिया के कई गांवों में इस हादसे के बाद मातम छा गया है। घरों में चूल्हे नहीं जले और हर तरफ सिर्फ अपनों को खोने की चीखें और दर्द सुनाई दे रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही पूर्णिया एसपी स्वीटी सहरावत जीएमसीएच पहुंचीं और घायलों का हाल जाना। उन्होंने पुष्टि की कि 13 लोगों की मौत हो चुकी है और 8 घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। जीएमसीएच में दो दर्जन से ज्यादा घायलों का इलाज चल रहा है, जिनमें से कई की हालत चिंताजनक है। प्रशासन लगातार घायलों की निगरानी कर रहा है, लेकिन लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि नशे में धुत ड्राइवर और तेज रफ्तार पर आखिर कब रोक लगेगी।
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पीएम और सीएम ने जताया दुख, मुआवजे का ऐलान
इस दर्दनाक हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। केंद्र और राज्य सरकार ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। मृतकों के परिजनों को पीएम राहत कोष से 2 लाख रुपये और मुख्यमंत्री राहत कोष से 2 लाख रुपये दिए जाएंगे। वहीं घायलों को 50,000 रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी।