लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' गुरुवार को बिहार के पूर्णिया में पहुंचा। यहां हमने युवाओं से चर्चा में नई पीढ़ी के मुद्दों को समझने की कोशिश की। इस दौरान युवाओं ने अपने मुद्दों को बताया कि वे किस बात को लेकर किसी राजनीतिक पार्टी को सरकार में भेजना चाहते हैं।
इस दौरान एक युवा ने कहा कि पूर्णिया में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार और शिक्षा का है। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद से रेलवे में बहाली तक नहीं हुई है। मोदी सरकार ने रोजगार के बड़े-बड़े वादे किये थे, लेकिन वादे सिर्फ खोखले निकले। आज रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है और भी कई क्षेत्रों का निजीकरण किया जा रहा है। अब बेरोजगारी का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सीमांचल की शिक्षा व्यवस्था ठीक नहीं है। यहां शिक्षा का स्तर भी गिरता जा रहा है।
पूर्णिया में नौकरी का कोई संसाधन नहीं
वहीं एक और युवा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हम सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन अगर कोई वैकेंसी निकलती है, तो उसमें 500 सीट बिक ही जाती है। बहुत ज्यादा चुनौती है, दूसरे क्षेत्र में भी हम कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि यहां ना तो कोई फैक्टरी है और ना ही कोई और नौकरी का संसाधन है। इसलिए यहां के युवा बाहर जाकर काम ढूंढते हैं।