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बिहार उप चुनाव: साढ़े तीन साल बाद हो रही लालू की वापसी से गरमाई राजनीति, बयानबाजी भी शुरू हुई

Sun, 10 Oct 2021 10:27 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

बिहार में इस समय एक ओर पंचायत चुनाव चल रहे हैं तो दूसरी ओर दो विधानसभा सीटों पर उप चुनाव होने हैं। ऐसे में प्रदेश में सियासी माहौल वैसे ही गर्म है। वहीं, पिछले करीब साढ़े तीन साल बिहार से दूर रहे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के मुखिया लालू प्रसाद यादव 20 अक्तूबर को पटना पहुंचने वाले हैं। लालू की इस वापसी से राजद खासी उत्साहित है तो जदयू (जनता दल यूनाइटेड) ने इस पर तंज कसा है। 
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लालू प्रसाद यादव - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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राजद के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि विरोधी दलों को लालू यादव के नाम से ही बुखार आने लगा है। जब वह मैदान में उतरेंगे तो विरोधियों के पैरों तले की पूरी जमीन खिसक जाएगी। वहीं, जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज यादव ने इसे लेकर राजद पर तंज कसा और कहा कि लालू यादव उप चुनाव के लिए नहीं बल्कि उनके परिवार में जो विवाद चल रहा है उसके लिए पटना आ रहे हैं।

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नीरज यादव ने आगे कहा कि बिहार की जनता अब एक बार फिर लालू यादव के पुराने दौर में नहीं जाना चाहती। लालू जी, यहां आइए और चुनाव में घूमिए, अब आपको कहीं लालटेन नहीं मिलेगी, हर जगह एलईडी बल्ब मिलेगा। उन्होंने कहा कि आपने (लालू) भगवान के घर में भी अंधेरा कर रखा था, इसीलिए न्याय पालिका ने आपको सजा दी। बिहार की जनता दोबारा ऐसे लोगों को मौका नहीं देगी। 

वहीं, मृत्युंजय तिवारी ने नीरज यादव के इस बयान पर कहा कि लालू यादव के आने की खबर से जब ये इतना परेशान हो गए हैं, तो सोचिए कि जब वह आएंगे तब इनकी क्या स्थिति होगी। यहां उनके आने का इंतजार किया जा रहा है। मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि दोनों उप चुनावों में राजद साफ जीत रही है। लालू यादव वहां जाएं या न जाएं, हम इन चुनावों में 100 फीसदी जीत हासिल करने वाले हैं।
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बिहार की कुशेश्वस्थान और तारापुर विधानसभा सीटों पर 30 अक्तूबर को उप चुनाव होना है।

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बेटों में सुलह कराने पटना पहुचीं राबड़ी देवी

उधर, लालू के परिवार में चल रही वर्चस्व की लड़ाई के बीच अपने दोनों बेटों, तेजस्वी और तेजप्रताप, के बीच सुलह कराने के लिए राबड़ी देवी रविवार की शाम दिल्ली से पटना पहुंचीं। चर्चा है कि उन्हें तेजस्वी और तेज प्रताप के बीच सुलह कराने के लिए लालू यादव ने भेजा है। दोनों भाइयों के बीच उपचुनाव को लेकर विवाद चल रहा है। वहीं, जानकारी के अनुसार राबड़ी देवी तेज प्रताप के आवास पर पहुंचीं लेकिन दोनों की मुलाकात नहीं हो पाई। कहा जा रहा है कि तेज प्रताप को इसका पता चल गया था जिसके बाद वह वहां से चले गए।

मां राबड़ी देवी काफी देर तक बेटे का उनके आवास पर इंतजार करती रहीं लेकिन वह नहीं आए। आखिरकार राबड़ी देवी वहां से निकलकर अपने आवास पर लौट आईं। राबड़ी देवी के वहां से निकलने के थोड़ी देर बाद ही तेजप्रताप यादव अपने आवास पर पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पटना के राजनीतिक गलियारे में कयासों का बाजार गर्म है।

लालू यादव ने जनशक्ति यात्रा रुकवाने के लिए राबड़ी को पटना भेजा?
तेज प्रताप यादव सोमवार को जयप्रकाश नारायण की जयंती पर पटना के गांधी मैदान से कदम कुआं स्थित जेपी आवास तक जनशक्ति यात्रा निकालने वाले हैं। सूत्रों का कहना है कि परिवार और पार्टी के मुखिया लालू प्रसाद यादव ने आनन-फानन में राबड़ी देवी को पटना भेजा है ताकि वह तेज प्रताप यादव को जनशक्ति यात्रा निकालने से रोक सकें। लेकिन मां राबड़ी देवी से तेज प्रताप यादव के कन्नी काटने से जनशक्ति यात्रा टलना फिलहाल मुश्किल लग रहा है।

राबड़ी देवी की बात मानते रहे हैं तेज प्रताप यादव
लालू प्रसाद यादव के परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि तेज प्रताप यादव परिवार में सबसे ज्यादा मां राबड़ी देवी की ही बातें मानते हैं। पत्नी एश्वर्या के साथ दूरियों पैदा होने पर भी मां राबड़ी देवी सदैव तेज प्रताप यादव के साथ खड़ी रही थीं। माना जाता है कि कई मौकों पर परिवार में राबड़ी देवी तेज प्रताप यादव की बातें मानती रही हैं। माना जा रहा है कि इस बार तेज प्रताप यादव के तेजस्वी यादव के खिलाफ बयानबाजी और लालू प्रसाद यादव के दिल्ली में कैद करके रखने वाले बयान से आहत हैं।

राबड़ी देवी भली-भांति समझती हैं कि दोनों भाइयों के विवाद से सबसे ज्यादा परिवार और पार्टी के मुखिया लालू प्रसाद यादव की छवि को नुकसान हो रहा है। इसलिए राबड़ी देवी इस बार तेज प्रताप यादव की राजनीतिक इच्छा पूरी करने के बजाय उन्हें समझा-बुझाकर सारा विवाद सुलझाने की कोशिश में पटना आई हैं। हालांकि राबड़ी देवी के पटना आगमन पर तेज प्रताप यादव ने जो रवैया दिखाया है उसे देखकर यह तय हो गया है कि इस राजनीतिक परिवार का विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है।
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