केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने एक बार फिर से महागठबंधन सरकार और कांग्रेस पर निशाना साधा है। तीन दिवसीय कार्यक्रम पर अपने संसदीय क्षेत्र बेगूसराय पहुंचे भाजपा के फायर ब्रांड नेता गिरिराज सिंह ने महिला आरक्षण बिल को लेकर राजद द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि एक वह समय था जब उनके द्वारा बिल को फाड़ दिया गया था और आज जब बिल से आपत्ति थी तो फिर उन्होंने समर्थन क्यों किया? संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें कि ओबीसी समाज को अलग से आरक्षण दिया जाए। यह सुविधा सिर्फ एससी एसटी के लिए उपलब्ध है।
घड़ियाली आंसू बहाकर दिखावा करने की कोशिश कर रही राजद
मोदी सरकार की तारीफ करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को लाकर नरेंद्र मोदी सरकार ने एक तरफ जहां हिम्मत का काम किया है तो दूसरी तरफ महिला के प्रति अपनी आस्था को भी प्रदर्शित किया है। राजद द्वारा सिर्फ घड़ियाली आंसू बहाकर दिखावा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने पूर्व मंत्री जयराम रमेश द्वारा नए संसद भवन को थिएटर कहने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा है कि जिस तरह से लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर के संबंध में उनके द्वारा टिप्पणी की जा रही है। वह कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है।
सनातन को समाप्त करने की साजिश की जा रही है
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब से I.N.D.I.A. गठबंधन का नाम दिया गया है। तब से सिर्फ सनातन को समाप्त करने की साजिश की जा रही है। आज कांग्रेसियों के द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली दी जा रही है जो सूरज पर थूक फेंकने के समान है क्योंकि सूरज पर यदि कोई थूक फेंकने का प्रयास करता है। वह कीचड़ पुनः उसी पर आकर गिरता है।
प्रशासन सिर्फ हिंदुओं पर आघात करने का काम कर रही है
बेगूसराय में शनिवार को हुए हुए सांप्रदायिक उन्माद पर चोट करते हुए कहा कि बिहार की सरकार एवं स्थानीय प्रशासन सिर्फ हिंदुओं पर आघात करने का काम कर रही है। क्योंकि वहां के स्थानीय लोगों के अनुसार शराब पीकर मुसलमान उन्मादियों के द्वारा शिवलिंग को तोड़ा गया था और इसी के आक्रोश में हिंदुओं ने विरोध प्रदर्शन किया था। लेकिन, बाद में स्थानीय प्रशासन द्वारा असली मुजरिम को ना पकड़ते हुए हिंदू ट्रक ड्राइवर एवं स्थानीय लोगों को टारगेट किया गया और उन पर झूठे मुकदमे कर उन्हें फसाने की साजिश की गई है। यह अन्याय है। जनता सब देख रही है। अगले चुनाव में इसका जवाब जरूर देगी।