बाढ़ अनुमंडल में स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के लिए करीब 50 करोड़ रुपये खर्च कर पीएचसी, सीएचसी और अनुमंडलीय अस्पतालों की इमारतें तो खड़ी कर दी गईं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि ये सभी स्वास्थ्य संस्थान केवल रेफरल अस्पताल बनकर रह गए हैं। गंभीर ही नहीं, बल्कि सामान्य मामलों के मरीजों को भी तत्काल पटना रेफर कर दिया जाता है। इसके चलते इलाज में देरी से कई मरीजों की रास्ते में या इलाज के दौरान मौत हो रही है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग व्यवस्था सुधारने में नाकाम नजर आ रहा है।
सुविधाओं का घोर अभाव
करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से बने नए भवन में सुविधाओं के अभाव के कारण मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने को मजबूर हैं।
प्रसव सेवाएं भी बेहाल
अस्पताल के प्रसव विभाग में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। केवल सामान्य प्रसव के मामलों को रखा जाता है, जबकि थोड़ी भी जटिलता होने पर महिलाओं को रेफर कर दिया जाता है। आरोप है कि विभाग के आसपास दलाल सक्रिय रहते हैं, जो प्रसूता के परिजनों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पताल ले जाते हैं, जिससे निजी संस्थानों को मोटी कमाई होती है।
डॉक्टरों की भारी कमी
विधायक निरीक्षण पर उठे सवाल
गुरुवार को बाढ़ विधायक डॉ. सियाराम सिंह ने बेलछी पीएचसी का निरीक्षण किया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान सभी व्यवस्थाएं ठीक दिखाई गईं, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।
'रेफरल अस्पताल नहीं, बल्कि रेफर अस्पताल’ कहना चाहिए'
उन्होंने आरोप लगाया कि रात के समय प्रसव विभाग में एक भी महिला डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहती। सिजेरियन की सुविधा न होने से प्रसूताओं को पटना या निजी अस्पताल जाना पड़ता है। कागजों में दो दर्जन डॉक्टर तैनात हैं, लेकिन शिफ्ट आधारित ड्यूटी के कारण कई रोगों का इलाज ओपीडी में भी संभव नहीं हो पाता। उन्होंने कहा कि बिना ठोस सुधार के यह अस्पताल केवल दिखावटी विकास का उदाहरण बनकर रह गया है।