लॉ इन्टर्न छात्रा पर महिला और पुरुष अधिवक्ता आमने सामने
- फोटो : अमर उजाला
पटना हाईकोर्ट में अधिवक्ताओं को जिरह करते देखा जाता होगा, लेकिन जब वकील पर आरोप की बात आई तो पुरुष और महिला अधिवक्ताओं के बीच संग्राम छिड़ गया। संग्राम ऐसा कि महिला अधिवक्ता लॉ की इंटर्न छात्रा के पक्ष में खुलकर सड़क पर उतर आईं, जबकि पुरुष अधिवक्ता इसपर बगलें झांकने लगे। दर्जनों अधिवक्ता तो लॉ छात्रा की न्याय की लड़ाई के सवाल पर बात करने से बचते रहे, कुछ ने बात भी की तो टालने के अंदाज में इतना ही कहा- पहले जांच हो जाए, निष्पक्ष जांच हो जाए। बुधवार को पटना हाईकोर्ट के सामने चाणक्य लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र तो छात्राओं के साथ उतरे, मगर पुरुष अधिवक्ताओं ने न्यूट्रल रुख अपना लिया। 'अमर उजाला’ ने बुधवार को ही 16 पुरुष और 18 महिला अधिवक्ताओं से बात की। उनमें से चार-चार प्रतिनिधि बातचीत हू-ब-हू पेश है...
आरोपी को तुरंत जमानत कैसे मिल गई?
यह पूरी तरह से गंदगी से भरा हुआ मामला है, जिसके बारे में हमलोग बयान नहीं कर सकते हैं। हमारे बच्चे कहीं इंटर्नशिप करने के लिए नहीं जाएंगे? यह एक केस नहीं, पूरी स्त्री जाति पर सवाल है। किसी एक का सवाल नहीं। इसलिए, हम सब उस लडकी के साथ हैं। किस प्रक्रिया के तहत सबकुछ हो गया कि तुरंत आरोपी का बेल हो गया, यह मैं बता नही सकती हूं। इसकी अच्छी तरह से जांच होनी चाहिए। हमलोग चीफ जस्टिस के पास एक मांग पत्र लेकर जा रहे हैं। सोमवार को हमलोग उनसे मिलेंगे। हमलोग आम पब्लिक के लिए लड़ते हैं तो जल्दी न्याय कहां मिल पाता है? सामान्य लोगों को इसी तरह के मामले में न्याय पाने के लिए महीनों एड़ी रगड़ना पड़ जाता है। इतना घिनौना काम होने के बाद भी कानून के लोग भी उसे सपोर्ट कर दिए। ये होना नहीं चाहिए। थाना से ही बेल हो गया?
शैली कुमारी, सीनियर एडवोकेट
पुलिस ने जान-बूझकर बेल होने दिया
उसका बेल हुआ, यह बहुत गलत हुआ है। क्योंकि पुलिस ने उस लड़की को होल्डअप रखा। उसे प्रोड्यूस नहीं किया और इसका बेल होने दिया।
रेणुका शर्मा, सीनियर एडवोकेट
लेडी अधिवक्ता पीड़िता के साथ रहेगा
हमारा लेडी अधिवक्ता एसोसिएशन पटना उस लड़की के साथ है। हमलोग उसको न्याय दिलवाकर ही रहेंगे। हमलोग बिहार बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया के चेयरमैन रामाकांत मिश्र जी को भी अपना ज्ञापन सौंपेंगे।
प्रियंका, सीनियर एडवोकेट
लॉ इन्टर्न छात्रा पर महिला और पुरुष अधिवक्ता आमने सामने
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अगर घटना हुई है तो निंदनीय है
अगर इस तरह की घटना हुई है तो यह निंदनीय है। ऐसा नहीं होना चाहिए। जबतक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसपर कुछ भी कहना उचित नहीं होगा। जांच रिपोर्ट आने दीजिए, उसके बाद कुछ कहा जा सकता है। अभी प्री-मेच्योर है मामला।
अजय कुमार पाण्डेय, सीनियर एडवोकेट
लाइसेंस रद्द हो जाना चाहिए
यह चौथी बार काण्ड हुआ है। आगे भी हो सकता है। सब पचते गया, पचते गया। अब नहीं पचना चाहिए। बहुत अनहोनी हुआ है। कुंआरी लड़की है, छात्रा है। इसपर कड़ाई होनी चाहिए। लाइसेंस रद्द हो जाना चाहिए।
श्यामा रानी, सीनियर एडवोकेट
अगर आरोप सही है तो कार्रवाई हो
बार काउंसिल और इसके लिए बनी कमिटी जांच करेगी और जांच के बाद जो उचित हो, वह कार्रवाई होनी चाहिए। इसके लिए छात्रों को धैर्य रखना चाहिए। अगर आरोप सही है तो चाहे वकील हो या कोई और, कार्रवाई होनी चाहिए। और अगर आरोप गलत साबित होता है तो आरोप लगाने वाले पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
डॉ. संजय कुमार सिंह, सीनियर एडवोकेट
गंभीर आरोप है, निष्पक्ष जांच पर कार्रवाई हो
चूंकि आरोप बहुत ही गंभीर हैं, इसलिए सबसे पहले यह जरूरी है कि आरोप की निष्पक्षता से जांच हो जाए। इसके लिए बार कौंसिल ने एक कमिटी का गठन किया है। उम्मीद है कि कमिटी निष्पक्षता से जांच करेगी। जांच में अगर आरोप सिद्ध होता है तो प्रक्टिस करने का लाइसेंस रद्द होना ही चाहिए। तब आपराधिक कार्रवाई को संपुष्ट करते हुए एक उचित निर्णय पारित हो। यह आरोप अधिवक्ता समाज के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
अलेक्जेंडर अशोक, सीनियर एडवोकेट