डीएमके सांसद दयानिधि मारन के कथित विवादित बयान का मुद्दा गरमा गया है। पक्ष-विपक्ष इस विवाद को लेकर एक-दूसरे पर अपने तरह से हमले कर रहा है। इस सिलसिले में रविवार को केंद्रीय मंत्री नित्यानंद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग (डीएमके सांसद दयानिधि मारन की ओर इशारा करते हुए) उत्तर और दक्षिण क्षेत्र के आधार पर देश में अशांति और विभाजन पैदा करना चाहते हैं। दरअसल, द्रमुक सांसद मारन ने कथित तौर पर अपने बयान में कहा था कि उत्तर प्रदेश और बिहार से हिंदी भाषी तमिलनाडु आते हैं और निर्माण कार्य और शौचालयों की सफाई का काम करते हैं।
'इंडिया गठबंधन में शामिल पार्टियों को इसकी निंदा करनी चाहिए'
नित्यानंद राय ने यह भी मांग की कि बिहार की जो पार्टियां इंडिया गुट (गठबंधन) का हिस्सा हैं, उन्हें अपने सहयोगी दल के नेता के बयान की निंदा करनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दयानिधि मारन ने बेहद आपत्तिजनक बयान दिया है। एक तरफ पीएम मोदी ‘सबका साथ सबका विकास’ की बात करते हैं और आज लोग उत्तर भारत और दक्षिण भारत को बांटना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं होगा। बिहार की जो पार्टियां इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, उन्हें इसकी निंदा करनी चाहिए।
इस बयान पर हुआ बवाल
जानकारी के मुताबिक, यह विवाद डीएमके सांसद दयानिधि मारन के भाषण की एक वीडियो क्लिप के वायरल होने से शुरू हुआ है। उसमें वह कह रहे हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार से जो हिंदी भाषी तमिलनाडु आते हैं, वे निर्माण कार्य करते हैं या सड़कों और शौचालयों की सफाई करते हैं।
'फूट डालो-राज करो का कार्ड खेलना इंडी का डीएनए'
इस क्लिप को भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी साझा कर रहे हैं। सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में शहजाद पूनावाला ने लिखा कि एक बार फिर फूट डालो और राज करो कार्ड खेलने का प्रयास। पहले राहुल गांधी ने उत्तर भारतीय मतदाताओं का अपमान किया। फिर रेवंत रेड्डी ने बिहार डीएनए को गाली दी। फिर डीएमके सांसद सेंथिल कुमार ने कहा ‘गौमूत्र राज्य’। अब दयानिधि मारन ने हिंदी भाषियों और उत्तर के हिंदुओं/सनातन का अपमान किया। फूट डालो और राज करो का कार्ड खेलना इंडी (इंडिया गठबंधन) का डीएनए है।
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने इस मुद्दे पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राजद अध्यक्ष लालू यादव और तेजस्वी यादव के रुख पर सवाल उठाया।
'पीएसयू में केवल उत्तर भारतीयों को नौकरी दे रही सरकार'
वहीं, मारन की टिप्पणियों के बाद डीएमके प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों (पीएसयू) में भर्ती के दौरान उत्तर भारतीय राज्यों के लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिक विशिष्ट होते हुए एलंगोवन ने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश में भी सार्वजनिक उपक्रम हैं, लेकिन वे तमिलों की भर्ती नहीं कर रहे हैं।
एलंगोवन ने कहा कि अब सरकार केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों में काम करने के लिए उत्तरी राज्यों से लोगों का चयन कर रही है। यहां तक कि यूपी में भी सार्वजनिक उपक्रम हैं, लेकिन वे तमिलों की भर्ती नहीं कर रहे हैं। हमारे लोग यहां आने वाले किसी के भी खिलाफ नहीं हैं। वे छोटा-मोटा काम कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार उन्हें ऊंचे पदों पर बिठा रही है और तमिलों को उनके अधिकारों से वंचित कर रही है।