यह ताजा तस्वीर कैमूर के मोहनियां अनुमंडल अस्पताल से सामने आई है।
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कैमूर बिहार के सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज के दावों की पोल एक बार फिर कैमूर जिले के मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल में खुल गई। मुजान गेट के पास पिकअप की टक्कर से बाइक सवार तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे में घायल शहबाजपुर निवासी प्रिंस कुमार के पैर में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। लेकिन अस्पताल प्रशासन के पास मरीज के टूटे पैर को सपोर्ट देने के लिए एक मेडिकल स्प्लिंट या प्लास्टर तक उपलब्ध नहीं था। हड़बड़ी में स्वास्थ्यकर्मियों ने डॉक्टर के सामने ही युवक के फ्रैक्चर पैर पर गत्ते (कार्टून) का टुकड़ा बांधा और उसे बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया।
मरीज के परिजनों ने निकलते समय जताई आशंका
इस घटना के बाद मोहनियां अनुमंडलीय अस्पताल की लाचार और बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने कहा कि एक तरफ सरकार रेफर नहीं किए जाने की बात कह रही है और दूसरी ओर अनुमंडल स्तर के इतने बड़े अस्पताल में पट्टा (splint) या बेसिक मेडिकल किट का न होना अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को दर्शाता है। मरीज के परिजनों ने अस्पताल से निकलते हुए आशंका जताई कि फ्रैक्चर वाले अंग को सही सपोर्ट न मिलने से परिवहन के दौरान हड्डी और मांसपेशियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
एनएच पर हादसे लगातार, रेफर भी इस हाल में कर रहे
नेशनल हाईवे के पास स्थित होने के कारण यहां अक्सर सड़क दुर्घटना के मरीज आते हैं, फिर भी आपातकालीन सुविधाओं के नाम पर अस्पताल सिर्फ 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गया है। स्थानीय निवासियों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और जिला प्रशासन से मांग की है कि इस लापरवाही की निष्पक्ष जांच की जाए और दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल में जरूरी संसाधनों की तुरंत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।