नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा और लगातार हो रही बारिश के असर से बिहार की कई नदियां उफान पर हैं। गंडक, गंगा, सोन, फल्गु, मोरहर और निरंजना नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच अब सोन नदी को लेकर प्रशासन सतर्क हो गया है। बाणसागर बांध और इंद्रपुरी बराज से पानी छोड़े जाने के बाद नदी किनारे बसे लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
बाणसागर से सोन में छोड़ा जा रहा पानी, बढ़ी निगरानी
दो गेटों से 105 क्यूमेक्स पानी का डिस्चार्ज
बाणसागर बांध के स्पिलवे से फिलहाल दो रेडियल गेटों के माध्यम से 105 क्यूमेक्स पानी छोड़ा जा रहा है। वहीं, स्पिलवे और पावर हाउस-3 से सोन नदी में छोड़े जा रहे पानी का कुल प्रवाह 279.59 क्यूमेक्स दर्ज किया गया है। जल संसाधन विभाग ने सोन नदी के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के करीब न जाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
इंद्रपुरी बराज के 52 गेट खुले, करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा
बाढ़ के खतरे को देखते हुए प्रशासन अलर्ट
नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद बिहार के सीमावर्ती और नदी किनारे वाले जिलों में प्रशासन पहले से सतर्क है। कई जगहों पर निचले इलाकों में पानी भरने की स्थिति बनी हुई है। सोन नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, जल संसाधन विभाग और मैदानी अमले को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
ऐसे गांवों में सावधानी बरतने की अपील
प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति पर पूरी नजर रखी जा रही है। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए संबंधित विभागों को तैयार रहने को कहा गया है। लोगों से अपील की गई है कि नदी में स्नान करने, मछली पकड़ने या किसी अन्य काम से नदी के पास जाने से बचें, क्योंकि जलस्तर बढ़ने के दौरान अचानक खतरा बढ़ सकता है। सोन नदी किनारे बसे गांवों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन लगातार अपडेट ले रहा है।
सारण में बाढ़ से 2.33 लाख लोग प्रभावित
सारण जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। जिले के 7 प्रखंडों की 35 पंचायतों के 109 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन ने अब तक 1206 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
155 नावों से चल रहा राहत अभियान
बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य तेजी से चल रहा है। प्रशासन की ओर से 155 नावों का परिचालन किया जा रहा है। इसके अलावा एसडीआरएफ की 6 राफ्ट टीम और एनडीआरएफ की एक यूनिट को भी तैनात किया गया है। डोरीगंज में जलस्तर राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंचने के बाद प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया है।
मेडिकल टीम और भोजन की व्यवस्था
बाढ़ पीड़ितों के लिए जिले में 21 चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं, जहां अब तक 1371 लोगों का इलाज किया जा चुका है। छह बोट एंबुलेंस भी लगातार सेवा में हैं। प्रशासन ने अब तक 8945 ड्राई राशन और फूड पैकेट के साथ 11349 पॉलीथिन शीट का वितरण किया है।
15 सामुदायिक रसोई केंद्रों में मिल रहा भोजन
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 15 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक 12 हजार से अधिक लोगों को भोजन कराया गया है। जरूरत के अनुसार और केंद्र बढ़ाए जा रहे हैं।
डीएम वैभव श्रीवास्तव ने खुद संभाला मोर्चा
बिहार के कई जिलों में आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में युद्ध स्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। वहीं सारण के डीएम वैभव श्रीवास्तव खुद मोर्चा संभाल रखा है। डीएम खुद मोटरबोट और नाव के जरिए ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रहे हैं और फंसे हुए नागरिकों का रेस्क्यू कर रहे हैं। संवेदनशील और निचले इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात किया गया है, जो लगातार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। साथ ही प्रभावित परिवारों के बीच फूड पैकेट, मेडिकल किट, पॉलीथिन शीट और पेयजल का वितरण तेजी से किया जा रहा है।
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तटबंधों की मरम्मत जारी
दिघवारा के त्रिलोकचक और दरियापुर के सिमरिया में तटबंध में आई दरार को भरने का काम युद्धस्तर पर जारी है। वहीं पशुओं के लिए 8 शिविर बनाए गए हैं, जहां 678 पशुओं के लिए चारा और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।