लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' शनिवार को बिहार के आरा लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। वहीं, अब दोपहर में युवाओं से उनकी समस्याओं और मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।
अमर उजाला से बात करते हुए संजय कुमार सिंह ने बताया कि हम आर्मी की तैयारी करते हैं। सिपाही और ग्रुप डी लेवल की तैयारी करते हैं। 16 जून 2022 को अग्नीवीर योजना लागू हुई थी। उसमें हमने अपना फिजिकल किया था, उसके बाद लिखित परीक्षा भी दी थी और मेडिकल एग्जाम भी दिया था। सब कुछ होने के बाद मेरिट लिस्ट नहीं निकाली गई। उसके बाद उस बहाली को रद्द कर दिया गया। लड़कों को ज्वाइन नहीं कराया गया।
उन्होंने कहा कि ग्रुप डी में आईटीआई की क्या जरूरत है। रेलवे में टेक्नीशियन की क्यों भर्ती हो रही है। 2011 में एसएसीजीडी लागू हुआ। उसके बाद वैकेंसी आ रही थी साल दर साल। 2014 के एसएसीजीडी की भर्ती दो साल-तीन साल के गैप के बाद आई, जिससे बहुत सारे लड़कों की एज निकल गई। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है और हम इसे ध्यान में रखते हुए मतदान करेंगे।
वहीं, सुशांत शर्मा ने बताया कि अभी हमें किसी सरकार से कोई अपेक्षा नहीं है। अभी बीजेपी सरकार है जिसने युवाओं के लिए कुछ नहीं किया है। भले धार्मिक रूप से बहुत सारा काम किया है, लेकिन युवाओं के लिए फायदे का कोई काम नहीं किया है। इस सरकार में हमारे साथ तैयारी करने वाले कई युवकों ने फांसी लगा ली, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आरपीएफ में ही देख लीजिए चार हजार वैकेंसी कभी नहीं आई थी। 2018 के बाद अब 2024 में चार हजार की वैकेंसी निकाली है। इस एरिया में आरपीएफ को क्या सिर्फ चार हजार लोगों की जरूरत है? कितने सारे स्टेशन हैं और कितने सारे मंडल हैं, चार हजार से क्या होगा?
सुशांत ने कहा कि ऊपर से ये लोग कह रहे हैं कि आप में कैपिसिटी है तो ले लीजिए। मान लीजिए चार हजार लड़के ले लिए, उसके बाद और लड़का लोग कहां जाएंगे। बचे हुए लड़कों के लिए भी व्यवस्था चाहिए न। दो-चार हजार के बाद और लड़का लोग क्या करेंगे। अब बिहार के लोगों से ही अपेक्षा है कि वे ही कुछ कर सकते हैं।