पटना एम्स के डायरेक्टर डॉ. पीके सिंह के मुताबिक, कोरोना के नए वैरिएंट को B.1.617.2.1 या AY.1 यानी डेल्टा प्लस कहा जा रहा है। इसका प्रभाव महाराष्ट्र और कुछ अन्य राज्यों दिखने लगा है। ऐसे में इनकार नहीं किया जा सकता कि इसका संक्रमण बिहार में नहीं होगा। दरअसल, डेल्टा प्लस वैरिएंट की संक्रमण दर दूसरी लहर की तुलना में काफी ज्यादा है, जो घातक साबित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि डेल्टा प्लस वैरिएंट से बचने का सबसे आसान तरीका है कि लोग कोरोना गाइडलाइंस का पालन करें। मास्क और सामाजिक दूरी का ध्यान रखें। साथ ही, जरूरी होने पर ही घर से बाहर निकलें। डेल्टा प्लस वैरिएंट में कोवाक्सिन और कोविशील्ड की वैक्सीन कुछ प्रभावी है, लेकिन अभी इस पर कोई वैज्ञानिक अध्ययन सामने नहीं आया। डॉ. सिंह ने अनुमान जताया कि टीकाकरण के बाद विकसित एंटीबॉडी काफी हद तक सुरक्षा देगी।
गौरतलब है कि देश के बाकी राज्यों की तरह बिहार में भी टीकाकरण अभियान काफी तेजी से चलाया जा रहा है। टीकाकरण के मामले में इस वक्त बिहार देश के टॉप-10 राज्यों में शामिल है। प्रदेश में अब तक 45.96 लाख 18+ लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी जा चुकी है।