राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी 101-101 सीटों पर लड़ेगी। यह पहले से तय था कि 100 या 101 सीटों पर बराबर बराबर की भूमिका में दोनों दल रहेंगे। चिराग पासवान की पार्टी को 25 के आसपास सीटें मिल रही थी, लेकिन वह 29 तक अपनी संख्या लाने में कामयाब रहे। लोकसभा चुनाव के समय ही उन्हें 25 सीटों के आसपास का भरोसा दिया गया था। 'अमर उजाला' ने यह सब बातें तब भी कहीं थी। हिंदुस्तानी आवा मोर्चा को 6 सीटों से ही संतोष करना पड़ा, हालांकि यह पहले से तय था कि जीतन राम मांझी बगावत नहीं करेंगे। उपेंद्र कुशवाहा को भी आशा के अनुरूप सीटें मिलीं।
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे ज्यादा समझौता जनता दल यूनाइटेड ने किया है। जदयू ने इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ने पर सहमति जताई। पिछली बार जदयू ने 115 सीटों पर प्रत्याशी दिए थे हालांकि 43 सीटों पर जीत मिल पाई थी। भाजपा ने पिछली बार 110 सीटों पर प्रत्याशी दिए थे और उसके 74 विधायक बने थे। लोक जनशक्ति पार्टी पिछली बार एनडीए से अलग होकर 135 सीटों पर लड़ी थी, हालांकि उसके सिर्फ एक ही विधायक जीत सके थे। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा ने पिछली बार एनडीए में रहते हुए 7 सीटों पर प्रत्याशी दिए थे और चार पर जीत दर्ज हुई थी। इस बार हम से की मांग जीतने वाले 8 सीटों के साथ विकल्प के रूप में दो-तीन सीटों की थी, हालांकि वह मांग पूरी नहीं हुई। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने पिछली बार एनडीए से अलग और वास्तव में एनडीए के खिलाफ 99 प्रत्याशी दिए थे। खाता भी नहीं खुला था।