नीतीश सरकार बिहार में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉरलेंस की नीति अपनाने का दावा करती है। भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई भी होती है। अब घूससोर अफसरों और कर्मियों पर नकेल कसने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने खुद को स्मार्ट बनाने का फैसला लिया है। निगरानी की टीम अब अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल पर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगी। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी सेंटर बनाया जाएगा। निगरानी की टीम ने इस सेंटर के लिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेज दिया है।
निगरानी विभाग के अनुसार, हमलोग ऐसे अफसरों की लिस्ट तैयार कर रहे हैं, जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार में लिप्ट होने की शिकायत मिलती है। कई बार अफसर भ्रष्ट रहने के बावजूद रंगेहाथ पकड़े नहीं जाते हैं। वह किसी न किसी तरीके से बच निकलने हैं। ऐसे में इन अफसरों की भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। तकनीकी के जरिए निगरनी विभाग की टीम भ्रष्ट अफसरों पर नजर रखेगी। उनका सारा डाटा रखा जाएगा। पर्याप्त साक्ष्य मिलते ही उनपर कार्रवाई होगी।
अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा सेंटर
निगरानी सूत्रों की मानें तो पटना में इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल टेक्नोलॉजी सेंटर बनाने की तैयारी है। यह सेंटर अत्याधुनिक उपकरणों से लैस होगा। इसमें कृत्रिम मेधा (AI) की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मियों की ट्रैकिंग से लेकर उन्हें सजा दिलाने के मंत्र दिए जाएंगे। विभाग के बेस्ट अधिकारियों को सारे तकनीकों की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके बाद इन्ही बेस्ट अधिकारियों की टीम भ्रष्ट अधिकरियों तक पहुंचेगी।
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50 डीएसपी भी होंगे तैनात
निगरानी विभाग के डीजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि ब्यूरो में 50 इंस्पेक्टर और 50 डीएसी की तैनाती होगी। इसके अलावा 70 गाड़ियों की भी खरीद की जाएगी। ताकि विभाग न मैन पावर की कमी हो और न संसाधन की। जितेन्द्र सिंह गंगवार ने कहा कि ब्यूरो के स्तर से भी निगरानी संबंधी मामलों के निष्पादन के लिए ऑनलाइन पोर्टल प्रारंभ किया गया है। पिछले साल कुल 122 मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 102 मामले ट्रैप से संबंधित थे. सभी विभागों के अभियोजन स्वीकृति के लंबित मामलों की स्थिति की भी समीक्षा की गयी, जिसमें कुल 53 मामले लंबित पाए गए।