नालंदा जिले में पहले चरण के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीतिक गतिविधियां चरम पर पहुंच गई हैं। 6 नवंबर को होने वाले मतदान से पहले प्रत्याशी और उनके समर्थक घर-घर जाकर वोट की अपील कर रहे हैं। लेकिन गुरुवार को नालंदा की राजनीति में कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरे जिले में हलचल मचा दी। सोशल मीडिया पर दो विडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें वोट मांगने गए प्रत्याशियों और उनके समर्थकों को आम जनता ने जमकर खरी-खोटी सुनाई।
राजगीर में विधायक कौशल किशोर का विरोध
राजगीर विधानसभा क्षेत्र से जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रत्याशी और मौजूदा विधायक कौशल किशोर को गुरुवार को जनसंपर्क अभियान के दौरान जनता के गुस्से का सामना करना पड़ा। जब विधायक कौशल किशोर अपने समर्थकों के साथ राजगीर विधानसभा क्षेत्र के पोखरपुर गांव पहुंचे और लोगों से वोट की अपील करने लगे, तो ग्रामीणों ने उनका जोरदार विरोध किया।
मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बुड़बक विधायक वापस जाओ जैसे नारे लगाकर विधायक और उनके कार्यकर्ताओं का विरोध जताया। कुछ ग्रामीणों ने तो व्यंग्यात्मक लहजे में समर्थकों को मुर्गा खाने जैसी बातें भी कही। हालांकि, विरोध करने वाले व्यक्ति ने ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जिंदाबाद के नारे भी लगाए। लेकिन स्थिति कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गई।
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ग्रामीणों का आरोप है कि विधायक कौशल किशोर ने अपने कार्यकाल में क्षेत्र के विकास कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। विकास की उम्मीदों पर खरा न उतर पाने के कारण जनता में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि चुनावी दौर में जब प्रत्याशी वोट मांगने आए तो जनता ने अपना गुस्सा खुलकर जाहिर किया।
नालंदा विधानसभा क्षेत्र में भी हुआ विरोध
दूसरी घटना नालंदा विधानसभा क्षेत्र की है, जहां जदयू विधान पार्षद (एमएलसी) रीना यादव के पति पूर्व एमएलसी राजू यादव जदयू प्रत्याशी श्रवण कुमार के लिए वोट मांगने निकले थे। नालंदा विधानसभा क्षेत्र के प्रहलाद नगर गांव में जैसे ही राजू यादव ने अपने समर्थकों के साथ श्रवण कुमार के पक्ष में वोट देने की अपील शुरू की, ग्रामीणों ने महागठबंधन के प्रत्याशी के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। गांव में मौजूद लोगों ने छोटे मुखिया जिंदाबाद के नारे लगाते हुए जदयू प्रत्याशी श्रवण कुमार के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। महागठबंधन से कांग्रेस के उम्मीदवार कौशलेंद्र कुमार उर्फ छोटे मुखिया इस क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं।
चुनावी माहौल और जनता का मूड
इन दोनों घटनाओं ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार नालंदा जिले में चुनावी समीकरण काफी जटिल हो सकते हैं। जनता के विरोध ने सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रत्याशियों के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। सोशल मीडिया पर इन विडियो के वायरल होने से चर्चा और तेज हो गई है।