बिहार में सरकारी शिक्षकों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब राज्य सरकार ने शिक्षकों के लिए एक नया और सख्त आदेश जारी किया है। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, बिहार के सभी सरकारी शिक्षकों को अपनी चल-अचल संपत्ति और दायित्वो का पूरा ब्योरा विभाग को सौंपना होगा। जो शिक्षक इस आदेश का पालन नहीं करेंगे, उन्हें जनवरी महीने का वेतन जारी नहीं किया जाएगा।
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सभी श्रेणी के शिक्षकों पर लागू होगा नियम
शिक्षा विभाग द्वारा गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार, यह नियम किसी एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि सभी कोटि के शिक्षकों के लिए अनिवार्य है। इसमें प्रधानाध्यापक और विशिष्ट शिक्षक केसाथ-साथ बीपीएससी से नियुक्त विद्यालय अध्यापक और नियोजित शिक्षक भी शामिल हैं।
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तीन पेज का होगा हलफनामा, हस्ताक्षर अनिवार्य
विभाग ने ब्योरा जमा करने के लिए मानक भी तय कर दिए हैं। शिक्षकों को अपनी संपत्ति की जानकारी A-4 साइज के सादे कागज पर कंप्यूटर से टाइप करवाकर देनी होगी। यह विवरण कुल तीन पृष्ठों का होगा। प्रत्येक पृष्ठ के नीचे संबंधित शिक्षक के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। इसमें केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि शिक्षकों पर मौजूद ऋण या अन्य दायित्वों की जानकारी भी देनी होगी।
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क्यों लिया जा रहा है यह फैसला?
दरअसल, यह कार्रवाई बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन सोसायटी के निर्देशों के तहत की जा रही है। नियम के मुताबिक, राज्य के समूह 'क', 'ख' और 'ग' के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को हर साल 31 दिसंबर की स्थिति के आधार पर अपनी संपत्ति का विवरण देना होता है। चूंकि अब शिक्षक भी इसी श्रेणी में आते हैं, इसलिए उन पर भी यह नियम कड़ाई से लागू किया जा रहा है। इस संबंध में शिक्षा विभाग का स्पष्ट रूप से कहना है कि जब तक संपत्ति का विवरण पोर्टल या संबंधित कार्यालय में अपडेट नहीं होगा, तब तक वेतन के भुगतान पर रोक लगी रहेगी।