गंभीर आपराधिक आरोपों के सिलसिले में लगातार 30 दिनों तक जेल में रहने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्र शासित प्रदेश के मंत्री को पद से हटाने से जुड़े बिल पर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यह बिल असल में एक बड़ी साजिश का हिस्सा है।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि इस विधेयक को लाने के पीछे असली मंशा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर दबाव बनाने की है। उनका कहना है कि इस बिल के जरिए नीतीश कुमार को सीमा में रहने और जेडीयू नेताओं को मिलने वाले टिकटों में भाजपा नेताओं को शामिल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बिल आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू को नियंत्रण में रखने के लिए भी लाया गया है।
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आरजेडी नेता ने कहा कि इस पूरे खेल की वजह से ही गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में यह बिल पेश किया। उनके अनुसार, इस बिल को असल में नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू को डराने और ब्लैकमेल करने के लिए लाया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने कहा कि नीतीश कुमार के करीबी अधिकारियों पर ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग की जांच एजेंसियां सक्रिय हैं। यही हाल चंद्रबाबू नायडू का भी है, जिन पर भी जांच एजेंसियां लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की तरकीब यही है कि नए-नए कानून लाओ और नेताओं को ब्लैकमेल करो।
यह बिल सिर्फ आंखों में धूल झोंकने जैसा है: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कहा कि ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों ने पहले भी कई मुख्यमंत्रियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन बाद में सभी अदालत से बरी हो गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हों या झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, सभी अदालत से छूट गए। तेजस्वी यादव ने कहा कि जब तक अदालत किसी को दोषी न करार दे, तब तक कोई अपराध सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए यह बिल सिर्फ आंखों में धूल झोंकने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों से मिलकर देश के संविधान को खत्म करने का ठेका ले रखा है। इसके साथ नीतीश कुमार पर उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नया सीएजी घोटाला सामने आया है, जिसका हिसाब-किताब कहीं दर्ज नहीं है।