कैमूर जिले से होकर गुजर रही भारतमाला परियोजना के तहत बनने वाले एक्सप्रेसवे की जमीन अधिग्रहण को लेकर मंगलवार को किसानों और प्रशासन के बीच विवाद गहरा गया। इस दौरान पुलिस ने चार किसानों को हिरासत में लिया, जिन्हें देर रात छोड़ दिया गया।
बुधवार को भारतीय किसान यूनियन से जुड़े बड़ी संख्या में किसान चैनपुर प्रखंड के करवंदिया गांव पहुंचे। मौके पर किसी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। किसानों ने आरोप लगाया कि कैमूर डीएम ने पहले ही निर्देश दिया था कि चिन्हित जमीन पर किसान फसल नहीं लगाएं। इसके जवाब में किसानों की मांग थी कि 10 जुलाई तक मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जाए, लेकिन अब तक किसी को भी मुआवजा नहीं मिला है। किसानों का आरोप है कि पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी मशीन से खेतों में लगी खड़ी फसलें रौंद दी गईं।
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प्रशासन और कंपनी पर आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन और निर्माण कंपनी मिलकर जबरन जमीन कब्जा कर रहे हैं। किसान नेताओं ने कहा कि अधिकारी किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय कंपनी के एजेंट की तरह बर्ताव कर रहे हैं। किसानों ने सरकार की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि सरकार कॉर्पोरेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए अंग्रेजों जैसी नीति पर चल रही है। डबल इंजन सरकार किसानों को जबरन उनकी जमीन से बेदखल कर रही है।