नीतीश कुमार के नेतृत्व में अभी एनडीए सरकार की यह है ताकत।
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सीएम पद पर हैं... कब तक इस्तीफा नहीं दे सकते, यह भी जानें
दोनों बयानों का भावार्थ लोग अपने हिसाब से लगा सकते हैं, क्योंकि नीतीश कुमार ने राज्यसभा जाने की इच्छा जताते समय जो आधार बताया था- वह चौंकाने वाला था। बहुत अजूबा कि कोई मुख्यमंत्री सिर्फ इसलिए राज्यसभा जाने की इच्छा जताए, क्योंकि वह लोकसभा, विधानसभा और विधान परिषद् का सदस्य तो रहा है लेकिन देश के सर्वोच्च सदन का नहीं। राज्यसभा के नाम पर मुख्यमंत्री का पद त्यागने वाले पहले मुख्यमंत्री के रूप में खबरें भी चल चुकी हैं। लेकिन, सच्चाई यह है कि नीतीश कुमार ने अभी इस्तीफा नहीं दिया है। वह आज भी मुख्यमंत्री हैं। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव का परिणाम आने तक भी मुख्यमंत्री रह सकते हैं। और, 20 अप्रैल को राज्यसभा के पुराने सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने तक भी। या, शायद उसके बाद भी। मतलब, जीतने के बाद भी राज्यसभा जाकर शपथ नहीं ली, तो भी।
नीतीश कुमार चार बार मूड बदल चुके। अगर इस बार भी बदला तो भाजपा कहां रहेगी?
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भाजपा को हरी झंडी मिल चुकी, लेकिन महागठबंधन दे रहा गुपचुप ऑफर
नीतीश कुमार 16 मार्च को अगर राज्यसभा के लिए चुन लिए जाते हैं और तब वह इस्तीफा देते हैं तो 15 मार्च से 14 अप्रैल तक चलने वाला खरमास नई सरकार के गठन का रास्ता रोकेगा। यह वक्त काफी होगा कुछ नया खेला करने के लिए। इसलिए, भाजपा अपना सीएम तय कर जल्द से जल्द नीतीश को इस्तीफे के लिए तैयार करना चाहेगी। शायद 15 मार्च के पहले। यही कारण है कि भाजपा सारे काम तेजी से कर रही है। खासकर तब, जबकि वह देख रही है कि चुनाव परिणाम के महज तीन महीने बाद नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने की बात से गलत मैसेज गया है। इसके साथ ही वह यह भी देख रही है कि नीतीश कुमार ने भले ही भाजपा को अपनी ओर से हरी झंडी दे दी है, लेकिन महागठबंधन लगातार किसी-न-किसी रूप में उन तक ऑफर पहुंचा रहा है। आज भी तेजस्वी यादव ने कहा कि 25 से 30 के लिए जनादेश अगर नीतीश कुमार को मिला है तो उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाना बड़ी साजिश है, जिसका अंदेशा पहले से था। बिहार में बहुमत के लिए 122 चाहिए और गणित बहुत मुश्किल नहीं है समझना।
भाजपाई सीएम की तैयारी के बीच केंद्र के गणित पर भी लोगों की नजर
भाजपा बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री देने जा रही है। इस चर्चा और भाजपा की अपनी तैयारियों के बीच कई नाम दौड़ में हैं। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को दिल्ली बुलाया गया है। ऐसे राजनीतिक गहमागहमी के माहौल में लोग केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के गणित पर भी चर्चा कर रहे हैं। जब 2024 चुनाव के बाद केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की वापसी हुई थी तो नीतीश कुमार को किंगमेकर कहा गया था। लोग उस गणित को याद करना चाह रहे हैं। इसलिए, यह बताना जरूरी है कि सिर्फ नीतीश कुमार के हाथ खींचने से केंद्र की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 272 सांसद बहुमत के लिए चाहिए और नीतीश कुमार के 12 एमपी समर्थन वापस भी ले लें, तब भी (292-12=280) 280 की संख्या के साथ एनडीए की सरकार केंद्र में चलती रहेगी।
बिहार की मौजूदा सियासत पर विश्लेषण