Bihar : बिहार की राजनीति में मचे घमासान के बीच जदयू के भीतर का हंगामा दफ्तर तक पहुंच गया है। नतीजतन कार्यालय के अंदर और बाहर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। वरिष्ठ नेता भी कार्यालय आने से डर रहे हैं।
बिहार की राजनीति में ऐसा पहली बार देखा गया जब कार्यकर्ताओं के डर से बड़े चेहरे वाले और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहने वाले विधायक और मंत्री प्रदेश कार्यालय नहीं पहुँच पा रहे हैं। उन्हें पता है कि वहां जाने पर कार्यकर्ता उनका बहुत बुरा हश्र करेंगे।
बड़े नेता हैं निशाने पर
दरअसल जदयू के कार्यकर्ता काफी गुस्से में हैं। उनकी नाराजगी उन नेताओं से है जिनकी वजह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा जाने के लिए तैयार हो गए। उनका मानना है कि भाजपा के इशारे पर ऐसा हुआ है। इसी वजह से संजय झा, विजय चौधरी, ललन सिंह और संजय गांधी को ये सभी कार्यकर्ता जयचंद के नाम से पुकारने लगे हैं। पिछले दो दिनों से जदयू कार्यकर्ता जमकर हंगामा कर रहे थे। कुछ कार्यकर्ताओं पर तोड़फोड़ करने का भी आरोप लगा। इस वजह से कद्यु कार्यालय में विशेष पुलिसबलों की तैनाती की गई, ताकि किसी भी प्रकार के आकस्मिक हंगामे या कार्यकर्ताओं के द्वारा किए जाने वाले हमले से उनका बचाव किया जा सके।
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हंगामा के बाद सीएम ने की थी बैठक
कार्यकर्ताओं के बढ़ते हंगामे को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार की शाम को बैठक की जिसमें सभी विधायकों और एमएलसी को उन्होंने समझाया। साथ ही उन्होंने हंगामा कर रहे कार्यकर्ताओं को भी समझाने की जोर दिया। उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली जा रहा हूं जरुर लेकिन आपसे दूर नहीं जा रहा हूं। आपके साथ बना रहूँगा। विधायकों ने बताया कि बैठक में शामिल विधायकों ने भारी मन से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की बात स्वीकार तो कर ली, लेकिन उनके पास अपने समर्थकों के सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं है। यही कारण है कि ये नेता फिलहाल जदयू के प्रदेश कार्यालय आने से कतरा रहे हैं।
पुलिस बल की सख्ती बढ़ी
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समझाने का ही शायद असर था, जिस वजह से आज जदयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं की भीड़ नहीं दिखी। कुछ लोग तो दबे सुर में यह भी कह रहे थे कि शोर-शराबा करने वाले कार्यकर्ताओं को अंदर आने की मनाही कर दी गई थी। इसको लेकर विशेष पुलिस बल की तैनाती की गई है। जदयू कार्यकर्ताओं में अब भी गुस्सा है, नाराजगी है, जिसे वरिष्ठ नेता बखूबी समझ रहे हैं।