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Bihar: पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना को मिलेगी रफ्तार, भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में तेजी

Sat, 19 Jul 2025 06:36 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar: अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा 26(3) के तहत अधिग्रहण शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र में प्रचलित बाजार दर के आधार पर पुनरीक्षित मूल्य निर्धारण करना अनिवार्य है।
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सांकेतिक - फोटो : AI
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विस्तार
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भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना (चरण-II) के तहत पटना से पूर्णिया तक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे निर्माण की योजना को रफ्तार देने की तैयारी शुरू हो गई है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के उद्देश्य से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रारंभिक अधिसूचना से पूर्व प्राक्कलित न्यूनतम मूल्य (एमवीआर) के विशेष पुनरीक्षण का निर्देश दिया है।

इस संबंध में वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा, मधेपुरा और पूर्णिया जिलों के समाहर्ताओं को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने स्पष्ट किया है कि केन्द्रीय मूल्यांकन समिति से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।

अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 की धारा 26(3) के तहत अधिग्रहण शुरू करने से पहले संबंधित क्षेत्र में प्रचलित बाजार दर के आधार पर पुनरीक्षित मूल्य निर्धारण करना अनिवार्य है। इसी क्रम में, बिहार स्टॉम्प (संशोधन) नियमावली, 2013 के उपनियम-7 के तहत एमवीआर के विशेष पुनरीक्षण का अधिकार जिला प्रशासन को प्राप्त है, जिसकी प्रक्रिया मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की अधिसूचना के आलोक में की जाएगी।

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यह निर्देश 17 जुलाई 2025 को मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद जारी किया गया। बैठक में परियोजना से जुड़ी भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित और न्यायसंगत बनाने पर विशेष बल दिया गया।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों और भू-स्वामियों को उनकी भूमि के बदले उचित, पारदर्शी और वर्तमान बाजार दर पर आधारित मुआवजा मिले, जिससे भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कोई अनावश्यक विलंब न हो और भारतमाला जैसी महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं का समय पर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। यह निर्णय अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को जनहितकारी और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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