बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2026 को लेकर प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी महासंग्राम को अंतिम रूप देने की तैयारियों में जुट गया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सूबे में इस बार पंचायत चुनाव सितंबर के अंतिम सप्ताह से लेकर अक्टूबर के पहले सप्ताह के बीच शुरू कराए जा सकते हैं। शांतिपूर्ण और सुचारू मतदान सुनिश्चित करने के लिए पूरे चुनाव को आठ से नौ चरणों में आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इस बार का चुनाव कई मायनों में खास होने जा रहा है, क्योंकि आयोग ने तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े बदलाव किए हैं।
55 हजार से अधिक वार्डों पर पड़ेगा असर
चुनाव की तैयारियों के तहत आयोग ने पंचायतों के सीमांकन और जनसंख्या के आधार पर आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया को लगभग पूरा कर लिया है।
राज्य की 4,000 से अधिक पंचायतों और 55 हजार से ज्यादा वार्डों में इस बार नया आरक्षण रोस्टर लागू होने जा रहा है। इसके तहत महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और पिछड़ा वर्ग के लिए सुरक्षित सीटों में बड़ा फेरबदल होना संभव है। इस नए रोस्टर के आते ही कई दिग्गजों की सीटें बदल सकती हैं, जिसका स्थानीय राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा।
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15 जून तक पूरी हुई दावा-आपत्ति की प्रक्रिया
आरक्षण निर्धारण और प्रपत्र-1 को तैयार करने के लिए आयोग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए आयोग ने इस कार्य को पूरा करने और दावा-आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 जून 2026 किया था। समय-सीमा समाप्त होने के बाद अब आयोग अंतिम मतदाता सूची और बूथों के भौतिक सत्यापन के काम को तेजी से निपटाने में लगा है।
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