बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन बोआकॉन-2025 के दूसरे दिन इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नवीन ठक्कर, अहमदाबाद ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि फ्रैक्चर जोड़ने में हमें इनोवेशन की मदद लेनी चाहिए। एक समस्या जो फ्रैक्चर जोड़ने में आती है, वह है हड्डी का सही से जुट नहीं पाना। चूंकि इंप्लांट (हड्डी जोड़ने के लिए इस्तेमाल होनेवाला प्लेट) पश्चिमी देशों का बना होता है, इसलिए इसे वहां के लोगों के कद-काठी के अनुसार बनाया जाता है। यही कारण है कि यह इंप्लांट भारत के लोगों की हड्डी में फिट नहीं बैठता और नतीजतन फ्रैक्चर सही से ठीक नहीं होता है। इस क्षेत्र में कई तरह के रिसर्च हो रहे हैं और अपने देश में भी इंप्लांट अब बनाए जा रहे हैं। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि इंडियन ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सचिव डॉ राजीव रमण थे।
डॉ नवीन ठक्कर ने कहा कि डॉक्टरों को चाहिए कि वह ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इलाज के प्रति जागरूक करें। ग्रामीण क्षेत्रों में अगर फ्रैक्चर होता है तो मरीज को डॉक्टर तक पहुंचने में काफी देर हो जाती है, जिसके कारण उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। समय से डॉक्टर के तक नहीं पहुंचने के कई कारण है, इसमें सामाजिक जागरूकता, आर्थिक तंगी और अनटेंड लोगों से इलाज कराना है। इसके अलावा ट्रैफिक नियमों का भी सही तरीके से पालन करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए। इससे एक्सीडेंट रुकेंगे।
पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल विद्यार्थियों को काउंसिलिंग सिखाना जरूरी
अधिवेशन के दौरान श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हाइयर एजुकेशन, चेन्नई के पूर्व कुलपति डॉ. विजय राघवन ने कहा कि पोस्ट ग्रेजुएट की ट्रेनिंग का स्तर पूरे देश में अलग- अलग है। इसका एक नेशनल स्टैंडर्ड तय किया जाना चाहिए और इसी हिसाब से पूरे देश में ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। इसके लिए क्षमता आधारित राष्ट्रीय मानक तय होना चाहिए, जिसे पूरे देश में लागू किया जा सके। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नए स्टूडेंट में काउंसेलिंग कराने की क्षमता को विकसित किया जाना चाहिए। डमी सिचुएशन देकर उन्हें विपरीत परिस्थितियों को हैंडल करने का गुर सिखाया जाना चाहिए। नए स्टूडेंट को उन्होंने सलाह दी कि मरीज जब इलाज कराने आए तो पहले उसे छूकर डायग्नोस करें। फिर अग्रेतर कार्रवाई करें।
दूसरे दिन आठ तकनीकी सत्र हुए
बोआकॉन 2025 के आयोजन समिति के सचिव डॉ. (प्रो) महेश प्रसाद ने बताया कि अधिवेशन के दूसरे दिन कुल 8 सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें 48 प्रजंटेशन दिखाए गए। गौरतलब है कि यह वार्षिक सम्मेलन ज्ञान भवन के सम्राट अशोक इंटरनेशनल कंवेंशन सेंटर में शुक्रवार से आयोजित किया जा रहा है, जिसमें राज्य और देश भर से आए हड्डी रोग विशेषज्ञ अपना शोध पत्र एवं सर्जरी की नई तकनीक के बारे में अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। अथ्र्रोप्लास्टी सेशन को डॉ. अभिषेक सर्राफ ने संचालित किया। एँकोलाइज्ड हिप विषय पर डॉ. विद्या सागर, डॉ. अशोक कुमार सिन्हा ने प्राइमरी कॉम्प्लेक्स टी एम आर पर अपनी बातें रखीं। ट्रॉमा सत्र में डॉ. प्रहलाद ने फ्रैक्चर एंड फिक्सेशन टेक्निक पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान डॉ. आशुतोष कुमार, डॉ. भुवन सिंह, डॉ. ज्ञान रंजन ने अपने विचार रखे। अन्य सत्र में डॉ. बी मुखोपाध्याय, डॉ. आर सी राम ने विस्तार से हड्डी रोगों पर चर्चा की। सीएमई प्रोग्राम के दौरान डॉ. आयुष कुमार सिन्हा, डॉ. संजय कुमार गुप्ता. डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. उमेश प्रसाद ने भी अपने राय रखे।