एडवोकेट जनरल बिहार पी.के. शाही
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बिहार के बिपार्ड (बिहार इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट) में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन रविवार को संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 जैसे तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन और उनके प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर एडवोकेट जनरल बिहार पी.के. शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नए कानूनों से न्याय प्रणाली में सुधार होगा और मुकदमों का निपटारा पहले की तुलना में तेज होगा।
नए कानूनों के महत्व पर जोर
एडवोकेट जनरल ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों को एक जुलाई 2024 से लागू किया गया है। इन कानूनों के तहत अनुसंधान की प्रक्रिया में फॉरेंसिक साइंस और वीडियोग्राफी का अनिवार्य उपयोग होगा, जिससे जांच प्रक्रिया पारदर्शी और सटीक बनेगी। उन्होंने कहा कि ये कानून न केवल कानून व्यवस्था में सुधार करेंगे बल्कि बिहार को अन्य राज्यों के समकक्ष लाने में भी मदद करेंगे।
फॉरेंसिक साइंस और वीडियोग्राफी का अनिवार्य उपयोग
सम्मेलन में इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि सात साल या उससे अधिक सजा वाले मामलों में फॉरेंसिक साइंस का उपयोग अनिवार्य होगा। जांच अधिकारी (आईओ) को घटनास्थल पर पहुंचने के पहले क्षण से ही फॉरेंसिक टीम के साथ मिलकर काम करना होगा।
- जांच की पारदर्शिता: अनुसंधान की वीडियोग्राफी को अनिवार्य किया गया है, जिससे किसी भी स्तर पर छेड़छाड़ या मनमानी की संभावना खत्म होगी।
- डायरी प्रक्रिया में बदलाव: पुराने समय में कोर्ट में डायरी मांगे जाने पर जांच अधिकारी उसे जल्दीबाजी में तैयार कर लेते थे। अब नए कानूनों के तहत प्रतिदिन डायरी अपलोड करना अनिवार्य होगा, जिससे जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी।
कार्यशाला में शामिल हुए देश भर के प्रतिनिधि
सम्मेलन में देशभर के पांच राज्यों के न्यायाधीश और 26 राज्यों के अधिकारी शामिल हुए। उन्होंने बिहार की बदलती स्थिति और सम्मेलन के सफल आयोजन की प्रशंसा की। प्रतिभागियों ने कहा कि इस कार्यशाला के माध्यम से उन्हें नए कानूनों को समझने और उनकी बारीकियों को जानने का अवसर मिला।
बदलते बिहार की तस्वीर
एडवोकेट जनरल पी.के. शाही ने कहा कि बिहार अब 1990 के दशक का राज्य नहीं है। यह अब देश के अन्य राज्यों के समकक्ष खड़ा है।
- नए कानूनों से बढ़ेगी जांच की गुणवत्ता: नए प्रावधानों से पुलिस की मनमानी पर रोक लगेगी। जांच अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाएंगे और उन पर नियंत्रण बढ़ेगा।
- न्यायालय में तेजी: फॉरेंसिक और वीडियोग्राफी से अदालतों में मामलों का निष्पादन तेज होगा।