राज्य के सभी जिलों में जल्द ही एफएसएल कार्यालय की स्थापना की जाएगी। प्रत्येक जिले में कम से कम एक कार्यालय स्थापित करने की योजना है। वर्तमान में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, राजगीर और पूर्णिया में एफएसएल कार्यालय या चलंत विधि विज्ञान इकाई कार्यरत हैं। शेष जिलों में कार्यालय खोलने को लेकर सीआईडी विंग ने तैयारी तेज कर दी है।
सभी कार्यालयों में कम से कम एक एफएसएल मोबाइल वैन भी तैनात की जाएगी। वर्तमान में 17 मोबाइल वैन 13 जिलों में कार्यरत हैं। इनकी संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अक्तूबर तक 34 नए वैन की खरीद प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद कुल संख्या 51 हो जाएगी। बड़े शहरों या जिन जिलों में अधिक एफआईआर दर्ज होते हैं, वहां एक से अधिक वैन दी जाएगी। इसके अलावा 50 विशेष वाहनों की मांग गृह विभाग से की जा रही है, जिसके लिए प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा।
ये वैन अत्याधुनिक फॉरेंसिक उपकरणों से लैस रहती हैं। इनमें फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट, नारकोटिक्स, रक्त और अन्य जैविक साक्ष्य जुटाने के लिए किट मौजूद रहते हैं। उच्च क्षमता वाले कैमरे और कृत्रिम रोशनी के साधन भी होते हैं, जिससे घटनास्थल पर जांच आसान हो जाती है।
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बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) लागू होने के बाद जिन अपराधों में सात साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है, उनमें मौके पर एफएसएल टीम की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है। इसी वजह से एफएसएल कार्यालय और वैन की जरूरत बढ़ गई है।
नए कानून लागू होने के बाद अब तक 16,486 मामलों में एफएसएल की टीम या वैन की मांग की गई थी। इनमें से 12 हजार से अधिक मामलों में मौके पर जाकर जांच की गई, जो कुल का 73 प्रतिशत है। लक्ष्य है कि इसे भविष्य में 100 प्रतिशत तक पहुंचाया जाए।
क्या कहा एडीजी ने
"एफएसएल का कार्यालय सभी जिलों में खोलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 17 मौजूदा वैन के अतिरिक्त 34 नए वाहनों की खरीद अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी। साथ ही 50 और वाहनों की मांग गृह विभाग से की गई है। एफएसएल को जिला स्तर पर सुदृढ़ करने की प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।"
पारसनाथ (एडीजी- सीआईडी, बिहार पुलिस)