बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कम से कम पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी से नसीहत लेने की जरूरत नहीं है। पश्चिम बंगाल में आज जो हालात बने हुए हैं, उसके लिए ममता बनर्जी का गैर जिम्मेदाराना बयान और कानून व्यवस्था को पटरी पर लाने में असफल रहने की वजह, जिम्मेदार है।
पश्चिम बंगाल में आज गृह युद्ध जैसे हालात हैं। लोगों की हत्याएं, आगजनी एवं हिंसा की घटनाओं ने भयभीत लोगों को पलायन करने के लिए बाध्य कर दिया है। जो बंगभूमि कभी कविवर रविन्द्र नाथ ठाकुर एवं काजी नजरुल इस्लाम की पंक्तियों से गुंजायमान हुआ करता था, घृणा वैमनस्य एवं हिंसा का पर्याय बन चुका है।
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ममता बनर्जी का शासन इससे निपटने में पूरी तरह से नाकाम रहा है। दूसरी तरफ बिहार में अमन चैन और शांति है। यहां बीस वर्षों के नीतीश सरकार के कार्यकाल के दौरान कभी भी कोई दंगा नहीं हुआ और न ही कभी कर्फ्यू लगा।
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यहां सभी धर्म और जाति को समानता के साथ देखा जाता है। ममता बनर्जी का बयान कि नीतीश जी थोड़े से पॉवर के लिए एनडीए के साथ खड़े हैं, केवल राजनीति से प्रेरित है। क्योंकि नीतीश कुमार के लिए सत्ता का अर्थ सेवा है, जो वह सभी वर्गों की समान भाव से करते रहे हैं।