कांग्रेस नेता छत्रपति यादव और आनंद माधव
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फर्जी है कमिटी
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य आनंद माधव ने बताया कि पार्टी का संविधान कहता है कि एआईसीसी सदस्यों का मनोनयन और निष्कासन केवल एआईसीसी ही कर सकती है, जो संगठन महासचिव के हस्ताक्षर से प्रभावी होता है। अतः इनके द्वारा किया गया निष्कासन पूर्णतः निराधार और गलत है। हम इसे स्वीकार नहीं करते। आनंद माधव ने आरोप लगाते हुए कहा कि कृष्णा अलावरू और राजेश राम पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग पार्टी के संविधान का पालन नहीं कर रहे, बल्कि स्वयं को संविधान से ऊपर समझते हैं। वहीं कांग्रेस के पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने यह पत्र ही फर्जी है। ये दोनों पार्टी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। अनुशासन समिती के अध्यक्ष तारिक अनवर हैं। चूंकि बिहार विधान सभा चुनाव में कृष्णा अलावरू और राजेश राम ने जो गड़बड़ियां की हैं, उन्ही को छिपाने के लिए यह सब किया जा रहा है, ताकि लोगों में भय पैदा हो सके। इस पत्र को हमलोग फर्जी मानते हैं क्यों कि जब वेणु गोपाल के हस्ताक्षर से पत्र निकलेगा तभी उसकी मान्यता होगी।
क्या लिखा पत्र में
कांग्रेस पार्टी के द्वारा जारी पत्र में लिखा है कि, "यह देखा जा रहा है कि आनंद माधव, पूर्व चेयरमैन रिसर्च विभाग एवं श्री छत्रपति यादव, पूर्व विधायक का पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्तता बढती जा रही है। अतः विषय की गंभीरता को देखते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के माननीय बिहार प्रभारी एवं प्रदेश कांग्रेस के माननीय प्रदेश अध्यक्ष से विमर्श के उपरांत इन दोनों को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता से छह वर्षों के लिए निष्कासित किया जाता है।