फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Dalit Sub-groups Reservation: चिराग पासवान बोले- उनकी पार्टी दलित उप-समूहों पर SC के फैसले के खिलाफ करेगी अपील

Sat, 03 Aug 2024 04:04 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Dalit Sub-groups Reservation News: लोजपा रामविलास नेता चिराग पासवान ने कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकांश लोग, यहां तक कि संपन्न परिवारों से आने वाले और शिक्षा तक पहुंच रखने वाले लोग भी अस्पृश्यता का सामना करते हैं। इसलिए, अनुसूचित जाति के भीतर उप-समूहों की अनुमति देना उचित नहीं है।
विज्ञापन
चिराग पासवान, लोजपा रामविलास नेता - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का विरोध किया, जिसमें राज्यों को 15 प्रतिशत कोटे के लिए अनुसूचित जातियों के भीतर उप-समूह बनाने की अनुमति दी गई है। लोजपा रामविलास नेता ने घोषणा की कि उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी।

विज्ञापन

 
पटना में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पासवान ने कहा कि वह जाति जनगणना के पक्ष में हैं, जिसके लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी जोरदार मांग कर रहे हैं। हालांकि उनका यह भी मानना है कि इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी सुप्रीम कोर्ट से 15 प्रतिशत एससी कोटे के भीतर उप-समूहों की अनुमति देने वाले अपने हालिया फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध करते हुए अपील करेगी।
 
चिराग ने कहा कि एससी कोटे में क्रीमी लेयर की अनुमति नहीं दी जा सकती। एससी कोटे के भीतर उप-समूहों की अनुमति देने से सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े वर्ग का उत्थान नहीं होगा, जो अस्पृश्यता की प्रथा का शिकार रहा है। हाजीपुर के सांसद, जिनके दिवंगत पिता रामविलास पासवान देश के बड़े दलित नेताओं में से एक थे, ने आश्चर्य व्यक्त किया कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में अस्पृश्यता शब्द का उल्लेख तक नहीं है।
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकांश लोग, यहां तक कि संपन्न परिवारों से आने वाले और शिक्षा तक पहुंच रखने वाले लोग भी अस्पृश्यता का सामना करते हैं। इसलिए, अनुसूचित जाति के भीतर उप-समूहों की अनुमति देना उचित नहीं है।
 
हालांकि, पासवान ने इस मुद्दे पर अपने गठबंधन सहयोगी जदयू द्वारा अपनाए गए रुख पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। दरअसल, जदयू ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नीतियों की पुष्टि के रूप में सराहा है, जिन्होंने वर्षों पहले राज्य में महादलित श्रेणी बनाई थी।
 
चिराग से जाति जनगणना की मांग के बारे में भी पूछा गया, जिसने हाल ही में संसद को हिलाकर रख दिया है। इसके जवाब में चिराग ने कहा कि मुझे लगता है कि हमें जाति जनगणना करानी चाहिए। लेकिन इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें