वार्षिक अधिवेशन बोआकॉन-25 में चर्चा करते चिकित्सक।
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बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के वार्षिक अधिवेशन बोआकॉन-25 के तीसरे और अंतिम दिन भी कई उप विषयों पर डिशक्शन, प्रजेंटेशन हुए। अंतिम दिन ऑर्थोपेडिक के स्टूडेंट के बीच क्वीज कॉम्पीटिशन भी हुआ, जिसमें विभिन्न मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थी हिस्सा लिए।
डिफॉर्मेटिज इन पेडियाट्रिक पेशेंट (बाल रोगी में शारीरिक बनावट की गड़बड़ी) पर बोलते हुए आईजीआईएमएस के डॉ. रितेश रूनू ने कहा कि अल्ट्रासाउंड से गर्भस्थ शिशु की शारीरिक बनावट जानी जा सकती है। यदि उसमें कोई असामान्यता पाई जाए तो जन्म लेते ही उसका इलाज शुरू किया जा सकता है। इस बीच माता-पिता की काउंसिलिंग करनी चाहिए। कई बार शिशु का शरीर जन्मजात टेढ़ा-मेढ़ा होता है या कोई अर्द्धविकसित होता या ज्यादा होता है। गर्भ के दौरान पता चल जाने से इलाज सटीक और ज्यादा कारगर होता है। सिंपल प्लास्टर या दूसरे आसान तरीके से इलाज संभव है।
हड्डी की बीमारी में सीधे डॉक्टर के पास ही जाएं
डॉ. रितेश ने बताया कि बचपन में चोट लगने और समय से इलाज नहीं पर हड्डी टेढ़ी हो जाती है। ऐसे में कभी हड्डी बिठाने वाले से इलाज ना कराएं। डॉक्टर के पास ले जाएं। बच्चों में हड्डी का इंफेक्शन बहुत सामान्य है। नजरअंदाज करने से हड्डी टेढ़ी हो जाती है। पैर छोटा-बड़ा हो जाता है। दिव्यांग हो जाने का खतरा होता है। प्रोटीन और कैल्सियम की वजह से रिकेट्स (हड्डी का नरम पड़ना और टेढ़ापन) नामक बीमारी बच्चों में हो जाती है।
बच्चों की अनदेखी से कई बीमारियां उत्पन्न होती है: डॉ. विकास
डॉ. विकास कुमार ने बताया कि बच्चों की शारीरिक समस्या की अनदेखी से कई बीमारियां होती हैं। गरीबी के कारण बच्चों को सही पोषण नहीं मिल पाता है। इससे भी हड्डी टेढ़ी-मेढ़ी या कमजोर हो जाती है। कई बार बच्चा दिव्यांग भी हो जाता है। बच्चों के हड्डी में संक्रमण भी होता है।
सीमित संसाधन में भी जूनियर को ट्रेंड किया: डॉ. अनिल
सम्राट अशोक कंवेंशन सेंटर में आयोजित बोआकॉन-25 के समापन समारोह में बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार ने पूरे आयोजन का एक्सीलेंट करार दिया। उन्होंने कहा कि हमने सीमित संसाधन में जूनियर डॉक्टर को ट्रेंड किया। मेरी सलाह है कि सभी नए एडवांसमेंट को अपनाएं। इसके लिए रेगुलर सीएमई, कांफ्रेंस आदि में हिस्सा लें। इलाज के दौरान नैतिकता को नहीं भूले। वहीं, बिहार ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के सचिव डॉ. प्रवीण कुमार साहू ने कहा कि इस आयोजन 600 से ज्यादा डॉक्टर जुड़े। आउटरीच प्रोग्राम शुरू किया गया है, ताकि ऑर्थोपेडिक सर्जन अपने ज्ञान को जिला स्तर तक के डॉक्टर के पास ले जाएं। वहीं आयोजन सचिव डॉ. महेश प्रसाद ने कहा कि हमने सारे कार्यक्रम को सही से आयोजित किया गया। हर लेवल पर अच्छा रहा। सभी ने प्रशंसा की। आईओए के पदाधिकारियों ने काफी सराहा। आगे भी ऐसे कार्यक्रम करता रहूंगा। स्पाइन सर्जरी के लिए वर्कशॉप जल्द ही करेंगे। डॉ. अनिल कुमार ने डॉ. महेश प्रसाद, उनकी पत्नी डॉ. नीलू प्रसाद और बेटा डॉ. सृजन को सम्मानित किया। आयोजन को सफल बनाने वालों को भी सम्मानित किया गया। समापन समारोह का मंच संचालन डॉ प्रवीण कुमार साहू और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. महेश प्रसाद ने किया।
पोस्टर प्रजेंटेशन के विजेता बने डॉ. आमेज रजा
अंतिम दिन पोस्टर प्रजेंटेशन हुआ जिसके विजेता डॉ. आमेज रजा बने जबकि उप विजेता डॉ. रंजीत बने। तीसरा स्थान डॉ. जॉली कुमारी का रहा।