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Bihar News: 30 साल पुराने इंदिरा आवास योजना के मकान ने लील ली पांच जिंदगियां, रातों-रात उजड़ गया पूरा परिवार

Mon, 10 Nov 2025 11:36 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News: बताया जा रहा है कि यह मकान करीब 30 वर्ष पहले इंदिरा आवास योजना के तहत बना था। समय बीतने के साथ घर की दीवारों और छतों में कई जगह दरारें आ गई थीं। पढे़ं पूरी खबर
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घटनास्थल पर जुटी भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पटना जिले के दानापुर दियारा स्थित मानस गांव में बीती रात एक दर्दनाक हादसा हुआ। करीब 9 बजे के आसपास जब परिवार के सभी सदस्य खाना खाकर सो गए थे, तभी अचानक पुराना मकान भरभराकर गिर गया। इस हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।

मृतक की पहचान बबलू के रूप में हुई है। बताया गया कि बबलू के पांच भाई हैं, जो सभी दूसरे राज्यों में रहकर मजदूरी का काम करते हैं। उनके साथ भाभियां और मां भी बाहर ही रहती हैं, जिसके कारण वे इस हादसे का शिकार होने से बच गईं। गांव वालों का कहना है कि अगर सभी घर पर होते तो शायद पूरी परिवार खत्म हो जाता।

30 साल पुराना मकान, इंदिरा आवास योजना से बना था

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मृतक की भाभी गुलशन खातून ने बताया कि यह मकान करीब 30 वर्ष पहले इंदिरा आवास योजना के तहत बना था। समय बीतने के साथ घर की दीवारों और छतों में कई जगह दरारें आ गई थीं। इसी कारण परिवार के अन्य सदस्यों ने घर छोड़कर बगल के खाली हिस्से में झोपड़ी बनाकर रहने का निर्णय लिया था। लेकिन बबलू अपनी पत्नी और बच्चों के साथ पुराने मकान में ही रह रहा था। किसी ने नहीं सोचा था कि वही मकान उनकी मौत की वजह बन जाएगा।

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मकान गिरने से मच गई चीख-पुकार

पड़ोसी राम मंगन राय ने बताया कि रात करीब 9 बजे जब बबलू अपनी पत्नी रोशनी खातून और बच्चों के साथ सोया था, तभी अचानक जोरदार आवाज के साथ पूरा मकान धराशायी हो गया। आवाज सुनकर गांव के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सबकुछ खत्म हो चुका था। सभी शव मलबे के नीचे दबे हुए थे। ग्रामीणों ने किसी तरह दरवाजा तोड़कर बबलू, उनकी पत्नी और बच्चों के शवों को बाहर निकाला।

गरीबी ने छीन ली जिंदगी
ग्रामीणों के मुताबिक, बबलू आर्थिक रूप से बहुत कमजोर था। पैसे की तंगी के कारण वह मकान की मरम्मत नहीं करा सका और न ही नए मकान का निर्माण कर पाया। यही वजह रही कि पूरा परिवार जर्जर मकान के नीचे दबकर खत्म हो गया। घटना की सूचना मिलने के बाद भी अब तक कोई बड़ा अधिकारी या जनप्रतिनिधि मौके पर नहीं पहुंचा है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि हादसे के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली।
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गांव पहुंचने के लिए नदी पार करना पड़ता है
स्थानीय लोगों ने बताया कि मानस गांव तक पहुंचने के लिए दानापुर से नदी पार करनी पड़ती है। फिलहाल गांव तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है। इसी वजह से राहत और बचाव कार्य में भी देरी हो रही है।

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