बिहार के पटना जिले में ग्रामीणों के नाम पर म्यूल अकाउंट खुलवाकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने का मामला सामने आया है। ताजा मामला बाढ़ थाना क्षेत्र के पंडारक गांव का है। यहां ग्रामीण महिलाओं ने साइबर थाने में लिखित आवेदन देकर ठगी की शिकायत की थी। शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस ने जांच शुरू की तो गांव में करीब 400 से 500 लोगों के म्यूल अकाउंट खुलवाए जाने की जानकारी सामने आई।
पटना साइबर डीएसपी संगीता कुमारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना पुलिस की एक टीम को पंडारक गांव भेजा गया। जांच के दौरान ग्रामीणों से पूछताछ की गई। पूछताछ में करीब 50 वर्षीय सीता देवी का नाम सामने आया। आरोप है कि सीता देवी ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर उनके बैंक खाते खुलवाती थी।
बताया गया कि अनाज की खरीद-बिक्री योजना, शौचालय निर्माण योजना और अन्य सरकारी योजनाओं की राशि दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों के बैंक खाते और सिम कार्ड सक्रिय कराए गए। पुलिस के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल साइबर अपराधियों ने ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया।
ग्रामीणों के नाम पर लाखों का लोन
पुलिस जांच में यह भी जानकारी सामने आई कि साइबर ठगों ने ग्रामीणों के नाम पर खोले गए म्यूल अकाउंट के जरिए लाखों रुपये का लोन भी लिया। इसका पता चलने के बाद ग्रामीणों को मामले की जानकारी हुई। साइबर डीएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान सीता देवी ने मामले में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
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मुखिया के घर से कई सामान बरामद
पुलिस ने गिरफ्तार महिला से पूछताछ के आधार पर एक मुखिया के घर पर भी छापेमारी की। यहां से कई मोबाइल फोन, एक वॉकी-टॉकी, दर्जनों सिम कार्ड, बैंक की चेकबुक, पासबुक और एटीएम कार्ड समेत अन्य सामान बरामद किए गए हैं।
पांच करोड़ से अधिक हो सकती है ठगी की रकम
पुलिस का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के जरिए की गई साइबर ठगी का आंकड़ा पांच करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। हालांकि, ठगी की वास्तविक रकम का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। साइबर थाना पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। साथ ही, मामले में बैंकों की संभावित संलिप्तता की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी बड़ी संख्या में खाते और सिम कार्ड किस प्रक्रिया के तहत सक्रिय कराए गए और इनके जरिए साइबर ठगी की रकम का लेन-देन कैसे किया गया?