2020 के चुनाव में महागठबंधन का प्रदर्शन।
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कांग्रेस 60 से कम सीटों पर लड़ना नहीं चाह रही
वहीं 2020 के चुनाव कांग्रेस ने 70 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से 19 पर ही जीत मिली थी। राजद और वामदल समेत अन्य दल भी चाहते हैं कि इस बार कांग्रेस के खाते में पिछली बार से कम सीट आए। लेकिन, कांग्रेस 60 से कम सीट पर मानेगी नहीं। हालांकि, खुद को कांग्रेसी बताने वाले सांसद पप्पू यादव कांग्रेस को 100 सीटें दिलाने की वकालत कर रहे हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं ने 80 सीटों की इच्छा जताई है। वहीं पिछले चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) छह सीटों पर चुनाड़ लड़ी थी। इसमें से दो सीटों पर जीत मिली थी। भाकपा माले ने 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। इसमें से 12 सीटों पर जीत मिली थी था। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी चार सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसमें दो सीटों पर जीत मिली थी। ऐसे में वामदल 40 से कम सीट पर चुनाव लड़ना नहीं चाह रहा।
पासवान और आदिवासी वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी
इंडिया गठबंधन की योजना पशुपति पारस को शामिल कर पासवान वोटों में सेंध लगाने की है। पारस लंबे समय से अलौली (खगड़िया) से विधायक रहे हैं। राजनीतिक पंडित कहते हैं कि गठबंधन में इन्हें दो से तीन सीटें मिल सकती हैं। वहीं झारखंड में राजद और कांग्रेस, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ चुनाव लड़ चुकी है। सरकार में भी है। बिहार में बांका, भागलपुर, पूर्णिया समेत कुछ जिलों आदिवासियों की संख्या है। बांका और भागलपुर के कुछ इलाके संथाल परगना से सटते हैं। इसलिए झारखंड से सटी हुई इन जिले के कुछ सीमावर्ती सीटों पर हेमंत सोरेन की पार्टी को मौका मिल सकता है। इससे आदिवासी वोट बैंक में भी सेंधमारी हो सकती है। हालांकि झामुमो ने बिहार की 16 विधानसभा सीटों- कटोरिया, चकाई, ठाकुरगंज, कोचाधामन, रानीगंज, बनमनखी, धमदाहा, रुपौली, प्राणपुर, छातापुर, सोनवर्षा, झाझा, रामनगर, जमालपुर, तारापुर, मनिहारी पर उतरने की इच्छा जताई है।