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Bihar News : आखिर सात दिन बाद आधी रात को भरत तिवारी के घर क्यों पहुंचे भोजपुर SP? दिल को सताने लगा है यह डर

Thu, 25 Jun 2026 04:14 PM IST
Krishan Ballabh Narayan न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar : राजनीतिक और सामाजिक विरोध के साथ महापंचायत का बड़ा असर पुलिस महकमा पर पड़ा है। यह चर्चा तब तेज हो गई जब खुद एसपी मृतक के घर पर रात के 12 बजे पहुंचे। लोग इसे कई तरह से देख रहे हैं।  
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आधी रात को एसपी पीड़ित के घर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में युवक भरत तिवारी की एनकाउंटर में मौत के बाद उपजा जनाक्रोश से अब पुलिस महकमा के बड़े अधिकारी भी डरने लगे हैं। अगर न्याय ही करना था तो घटना के तुरंत बाद भोजपुर एसपी मृतक भरत तिवारी के घर क्यों नहीं गए? आखिर क्या वजह है कि अचानक भोजपुर एसपी को यह ज्ञान आ गया कि अब घटना के सातवें दिन देर रात पीड़ित परिवार के घर पर जाना चाहिए? वहां पहुंचकर पुलिस अधीक्षक मृतक भरत तिवारी के माता-पिता और अन्य परिजनों से करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत की। उन्होंने पीड़ित परिवार के सदस्यों को ढांधस बंधाया और मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करने का भरोसा दिया। लेकिन सवाल अब भी व्ही है कि उनको यहां आने में सात दिन क्यों लग गए?

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बेटे को साजिश के तहत जानबूझकर निशाना बनाया
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे लगातार न्याय की गुहार लगा रहे हैं। परिजनों का सीधा आरोप है कि यह एनकाउंटर पूरी तरह फर्जी था और उनके बेटे को साजिश के तहत जानबूझकर निशाना बनाया गया। घटना के बाद से न सिर्फ पीड़ित परिवार बल्कि पूरे गांव और आसपास के इलाकों में पुलिस की कार्यप्रणाली के खिलाफ भारी नाराजगी व्याप्त है। स्थानीय लोग इसे पुलिस की खुली मनमानी करार दे रहे हैं। परिवार ने कहा कि सात दिन बाद किसी बड़े अधिकारी के आने से उम्मीद जगी है, लेकिन वे सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि ठोस कार्रवाई चाहते हैं।
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एसपी का आश्वासन-जांच में किसी भी स्तर पर नहीं होगा पक्षपात
कथित एनकाउंटर के बाद से बिलौटी गांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। ग्रामीण लगातार प्रदर्शन कर न्याय की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों के इस बढ़ते आक्रोश और मामले के लगातार तूल पकड़ने के बाद पुलिस कप्तान बिलौटी गांव पहुंचे हैं। हालांकि पुलिस अधीक्षक ने परिवार से पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई कारने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर पक्षपात नहीं होगा, पीड़ित परिवार को हर हाल में न्याय मिलेगा।
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क्यों सात दिन बाद आधी रात एसपी को आना पड़ा ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला अब काफी आगे बढ़ चुका है। लोग साफ़ तौर पर आरोप लगा रहे हैं कि ऐसा नहीं कि एनकाउंटर से पहले एसटीएस ने भोजपुर एसपी को होने वाले एनकाउंटर की जानकारी न दी हो। जब पोस्टमोर्टम के बाद शव को लेकर जब परिजनों ने सड़क जाम किया तो बिना एसपी के आदेश के लाठी चार्ज किया गया होगा। अब जब मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान ले लिया है तो प्रशानिक महकमा में बेचैनी छ गई है। जब विपक्ष के साथ-साथ सरकार में बैठे बड़े-बड़े नेता इस एनकाउंटर को हत्या बता रहे हैं तो पुलिस प्रशासन की बेचैनी बढ़ गई है। यह बेचैनी साफ़ दिख रही है नहीं तो रात के 12 बजे वह भी सात दिनों के बाद एसपी को परिजन से मिलने की क्या जरूरत पड़ गई?

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