मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अभिवादन करते हुए।
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चोट से उबरकर लौटे कप्तान हरमनप्रीत सिंह थोड़े दबाव में जरूर दिखे, लेकिन निर्णायक क्षणों में उन्होंने गोल दागकर टीम की लाज बचाई। कोच क्रेग फुलटन की रणनीति का असर भी मैदान पर साफ झलका। भारतीय डिफेंस ने कई मौकों पर शानदार खेल दिखाया, लेकिन कुछ क्षणों में विपक्षी खिलाड़ियों को स्पेस भी दिया। अमित रोहिदास पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके। मिडफील्ड और फॉरवर्ड लाइन में तालमेल की कमी दिखी। युवा फॉरवर्ड खिलाड़ियों ने जोश तो दिखाया, लेकिन अवसरों को गोल में बदलने में चूकते रहे। हार्दिक सिंह हमेशा की तरह टीम के मजबूत स्तंभ साबित हुए, जबकि गोलकीपर कृष्ण बहादुर पाठक ने बचाव जरूर किए, मगर उनका बॉडी लैंग्वेज चिंता का विषय रहा।
मैच के पहले हाफ में दोनों टीमें खुल कर खेल रही थी, जिसके वजह से ज्यादा गोल हुए। मैच में बराबरी पर आने के बाद चीन की टीम डिफेंसिव होकर मैन टू मैन मार्किंग करने की कोशिश की लेकिन भारतीय खिलाड़ियों के दबाव के चलते उनका डिफेंस टूट गया। मैच का निर्णायक क्षण आखिरी क्वार्टर में आया, जब हरमनप्रीत सिंह ने गोल दागकर भारत को जीत दिलाई। चीन ने आखिरी क्षण तक संघर्ष किया और भारतीय डिफेंस को लगातार दबाव में रखा। अब भारत का अगला मुकाबला जापान से होगा, जिसने अपने पहले मैच में कज़ाकिस्तान को 7-0 से हराकर मजबूत चेतावनी दी है। ऐसे में भारतीय टीम को आने वाले मैचों में और अधिक सावधानी एकजुटता तथा सटीकता से खेलना होगा।
मैच आंकड़े (भारत बनाम चीन)
भारत: पेनल्टी कॉर्नर: 12
गोल (PC से): 4
सर्किल एंट्री: 36
चीन: पेनल्टी कॉर्नर: 6
गोल (PC से): 3
सर्किल एंट्री: 13