भोजपुर जिले के आरा में जदयू के जिला कार्यकर्ता सम्मेलन में जमकर बवाल हुआ। यह हंगामा कार्यक्रम के दौरान बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी, सुमित कुमार सिंह, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में हुआ। मंच पर सम्मान और संबोधन नहीं मिलने को लेकर कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया, जिससे कार्यक्रम बार-बार बाधित हुआ।
जानकारी के मुताबिक, कार्यक्रम का आयोजन आरा के नागरी प्रचारिणी सभागार में हुआ था। सम्मेलन के दौरान कार्यकर्ता और जदयू के नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई। जदयू के एमएलसी और पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा के साथ भी कार्यकर्ताओं की तू-तू मैं-मैं देखने को मिली।
कार्यक्रम में बार-बार हुआ हंगामा
कार्यक्रम के दौरान युवा कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए मंच पर चढ़ने की कोशिश की। मंत्री अशोक चौधरी के बॉडीगार्ड ने उन्हें मंच से हटाने का प्रयास किया, जिससे विवाद और बढ़ गया। हंगामे के बीच अशोक चौधरी ने माइक संभालकर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। उन्होंने मंच पर नाराज कार्यकर्ताओं को बारी-बारी से बुलाकर अपनी बात रखने का मौका दिया।
युवा जदयू के पूर्व प्रदेश महासचिव विष्णु मिश्रा ने कहा कि पार्टी की अंदरूनी कलह के कारण कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री अशोक चौधरी के बॉडीगार्ड ने कार्यकर्ताओं के साथ धक्का-मुक्की की, जिससे गुस्सा और भड़क गया।
मंत्री अशोक चौधरी ने दी यह प्रतिक्रिया
मंत्री अशोक चौधरी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्वाभाविक है कि हर कोई अपनी बात रखना चाहता है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य कार्यकर्ताओं को एकत्रित कर उनमें जोश भरना और आगामी 2025 के चुनावों की तैयारी करना है। यह सम्मेलन भोजपुर जिले से शुरू हुआ है और इसे अन्य जिलों में भी आयोजित किया जाएगा।
हजारों कार्यकर्ताओं की मौजूदगी और अंतर्कलह का प्रदर्शन
सम्मेलन में जिले भर से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे थे। लेकिन भोजपुर जिले में जदयू के अंदरूनी कलह की झलक इस कार्यक्रम में साफ दिखाई दी। मंच पर बैठे बड़े नेताओं के सामने ही कार्यकर्ताओं के इस व्यवहार ने सभी को हैरान कर दिया। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं ने तंज कसे।
कार्यक्रम के बाद पार्टी की छवि पर सवाल
जदयू के इस सम्मेलन में हुई गहमागहमी और अंतर्कलह को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व के लिए यह घटना चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि आगामी चुनावों से पहले ऐसे विवाद पार्टी के अंदर अनुशासन और एकता पर सवाल खड़े करते हैं।