राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और पप्पू यादव। अब दिल्ली में कांग्रेस की बैठक में भी दिखे पप्पू यादव। यह भी दबाव की रणनीति।
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राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव के हाथ से पतवार कैसे अपने पास ली?
लोकसभा चुनाव में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने सीट बंटवारे से पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित करते हुए उन्हें चुनाव चिह्न देकर क्षेत्र भेज दिया था। ऐसा एक नहीं, कई मामलों में हुआ। यहां तक कि कांग्रेस में आने के लिए अपनी पार्टी का नामोनिशान खत्म करने वाले राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की पूर्णिया सीट पर दावेदारी भी राजद ने छीन ली थी। पप्पू यादव ने महागठबंधन और सरकार के खिलाफ निर्दलीय खड़े होकर पूर्णिया लोकसभा सीट खाते में कर ली। लोकसभा चुनाव में ऐसी कहानियों से सीख लेते हुए कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव की तैयारियां समय से पहले शुरू कर दी। बात तैयारियों से आगे की है, यह पिछले दिनों वोटर अधिकार यात्रा में कांग्रेस ने दिखा दिया।
बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में निर्वाचन आयोग की ओर से हो रहे मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा उठाया। कांग्रेस ने धीरे से उसे अपना मुद्दा बना लिया। पहले राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा निकालने का एलान किया। शुरुआत में तेजस्वी यादव को आगे रखा। जब भीड़ देख उत्साहित हुए तो बहन प्रियंका गांधी को बुला लिया। फिर I.N.D.I.A. के बाकी दलों के नेताओं को जगह देते गए। वोटर अधिकार यात्रा के अंतिम दिन तो पूरे पटना के पोस्टर-बैनर दिखा रहे थे कि यह कार्यक्रम सिर्फ कांग्रेस का है। मंच पर तेजस्वी यादव भी थे, लेकिन कांग्रेस का प्रभाव साफ दिख रहा था। मतलब, राहुल गांधी ने तेजस्वी यादव के हाथ से पतवार धीरे-धीरे अपने पास ले ली। यह अलग बात है कि कांग्रेस के पास सीएम का चेहरा के रूप में अब भी तेजस्वी यादव का विकल्प कोई नहीं है।
विज्ञापनों में सिर्फ एक बात- बिहार में आ रही कांग्रेस सरकार
बिहार विधानसभा चुनाव के हिसाब से राजनीतिक दलों के विज्ञापन आने लगे हैं। यह जनता के बीच है। कांग्रेस पिछले करीब तीन महीने से इसपर काम कर रही है। कांग्रेस के विज्ञापन में कहीं भी महागठबंधन या I.N.D.I.A. की चर्चा नहीं दिख रही। कांग्रेस सीधे कह रही कि बिहार में कांग्रेस सरकार बनाएगी तो यह होगा, वह होगा। 'अमर उजाला' ने इस बारे में कांग्रेस नेताओं से समझना चाहा तो बचाव के लिए यह कहा गया कि यह विज्ञापन कांग्रेस शासित राज्यों की उपलब्धियों को दिखाते हुए उस मॉडल को बिहार में लाने के लिए है और उन्हीं राज्यों के खाते से यह आ रहा है- इसलिए ऐसा है। ऐसे में सवाल यह भी है कि कांग्रेस शासित राज्यों से कद्दावर कांग्रेसी भी अगर यह विज्ञापन खर्च रहे हैं तो क्या उन्हें बिहार में गठबंधन की जानकारी नहीं है? निश्चित तौर पर है। वह वोटर अधिकार यात्रा में भी यह देख चुके हैं। लेकिन, फिर भी कांग्रेस का बिहार में यही विज्ञापन चल रहा है।