बिहार में जाति आधारित जन-गणना को लेकर पटना हाईकोर्ट में पूरे दिन सुनवाई हुई, लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें चलती रहीं। कोर्ट बुधवार को भी सुनवाई जारी रखेगा। पूरी सुनवाई के बाद ही फैसला आएगा। जनहित याचिका दायर करने वाले लोग इस बात से उत्साहित दिखे कि कोर्ट ने सरकार से जातिगत गणना के लिए कानून नहीं बनाए जाने पर सवाल पूछा। मुख्य न्यायाधीश ने महाधिवक्ता से पूछा कि सरकार को यह कराना था तो इसके लिए कोई कानून क्यों नहीं पास किया? इसपर महाधिवक्ता शाही ने जवाब दिया कि राज्यपाल के अभिभाषण में सारी बातें स्पष्ट की गईं कि इसे किस आधार पर कराया जा रहा है और इसका लक्ष्य अंतिम तौर पर राज्य की जनता के लिए योजनाओं को बनाने और क्रियान्वित करने का है।
जाति आधारित जन-गणना पर सोमवार को सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन जनहित याचिका पर सरकार की ओर से दिया गया बिंदुवार जवाब रिकॉर्ड पर नहीं होने के कारण मंगलवार की तारीख मिली थी। मंगलवार को दोपहर बारह बजे के बाद जातीय जन-गणना के खिलाफ याचिका दायर करने वालों का पक्ष सुनना शुरू हुआ। करीब पौने दो घंटे तक याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट में बिहार सरकार की ओर से महाधिवक्ता की दलील शुरू हुई। इसके बाद ब्रेक हुआ। ब्रेक के बाद फिर सुनवाई शुरू हुई। इस दौरान कोर्ट में सरकार की ओर से महाधिवक्ता पीके शाही ने अपनी बात रखी। इसके बाद बहस शुरू हुई। याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट अभिनव श्रीवास्तव और दीनू कुमार ने अपनी बातें रखीं।
ट्रांसजेंडर समुदाय की अपील को भी अटैच किया गया
हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ताओं को कोर्ट ने भरोसा दिलाया कि उनकी सारी बातें सुनी जाएंगी, जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं होगा। कोर्ट की ओर से निश्चिंत किए जाने के बाद सुनवाई शुरू हुई। हाईकोर्ट बिहार में जाति आधारित जन-गणना पर दायर तीन जनहित याचिकाओं की सुनवाई कर रहा है। इसमें ट्रांसजेंडर समुदाय की अपील को भी अटैच किया गया है। जाति आधारित जन-गणना में ट्रांसजेंडर को अलग जाति के रूप में चिह्नित किया गया है, जिसपर समुदाय ने सख्त आपत्ति जताते हुए कोर्ट का रुख किया था।
जाति गिनने पर stay granted या refused से पहले जानिए किस पक्ष का क्या है तर्क, किरदार कौन
याचिकाकर्ता दो बार सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं
जाति आधारित जन-गणन को बिहार सरकार ने जाति आधारित गणना बताते हुए एक सर्वे कहा है। सरकार के अनुसार, इसका लक्ष्य राज्य के तमाम लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का पता लगाते हुए उसी हिसाब से योजनाओं-सुविधाओं को तैयार करना है। दूसरी तरफ इसके खिलाफ जनहित याचिका दायर करने वालों का कहना है कि इससे सामाजिक दुराव फैलेगा और राज्य की ओर से जन-गणना कराया जाना असंवैधानिक भी है। याचिकाकर्ता इसके लिए दो बार सुप्रीम कोर्ट जा चुके हैं। पिछले महीने की 28 तारीख को सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट में ही तीन दिनों के अंदर सुनवाई कराने का निर्देश दिया था। उस निर्देश के तहत सोमवार को सुनवाई शुरू हुई, लेकिन सरकारी जवाब के दस्तावेज रिकॉर्ड फाइल में नहीं रहने के कारण मंगलवार की तारीख मिली थी।