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नवरात्र 2026: पटना के इस खास दुर्गा पूजा पंडाल में फरक्का बैराज की झलक, जानिए क्यों चुनी गई यह थीम?

Thu, 15 Oct 2026 10:57 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Navratri 2026: शारदीय नवरात्र का आज पांचवां दिन है। घरों के अंदर सुबह से देवी स्तुति चल रही है। पटना में कई जगह पूजा पंडाल बनाए गए हैं। हर एक पंडाल खास है। ऐसे में एक पूजा पंडाल ऐसा भी है, जहां पर बिहार की चिंता को दिखाया गया है। यह पंडाल सुर्खियों में है। आइये जानते हैं इसके बारे में...
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पटना में फरक्का बैराज की प्रतिकृति। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पटना के बोरिंग रोड स्थित जमुना अपार्टमेंट गली के कस्तूरबा पथ पर इस बार दुर्गा पूजा में फरक्का बैराज की प्रतिकृति आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह प्रतिकृति पूरी तरह तैयार भी नहीं हुई लेकिन अब ही इसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। श्री श्री सर्वजन दुर्गा पूजा समिति अपने आयोजन के 10 साल पूरे होने पर 55 फीट ऊंचा और 55 फीट चौड़ा पंडाल तैयार करा रही है। समिति ने इस बार फरक्का बैराज की थीम के जरिये बिहार के हित और फरक्का जलसंधि से जुड़े मुद्दे को सामने लाने की कोशिश की है।

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समिति के प्रधान सचिव जय मानव चन्द्र ने बताया कि यहां पर समिति के अध्यक्ष कुमार पंकज के नेतृत्व में वर्ष 2017 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। हमलोग पूजा आयोजन के साथ जनसमस्याओं, जनकल्याण और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता देती रही है। पिछले वर्ष हमलोगों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारतीय सेना के पराक्रम को सम्मान देने के लिए पहलगाम के गौरी शंकर मंदिर की थीम पर पंडाल बनवाया था। इस बार बिहार के हित से जुड़े मुद्दे को पंडाल की थीम बनाया गया है। पूरे बिहार में हमलोगों का पंडाल अपने अलग थीम के लिए जाना जाता है। इस बार हमलोगों ने बिहार की समस्या को पंडाल के जरिए दिखाने की कोशिश की है। उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस पर ध्यान देगी। 

फरक्का बैराज की प्रतिकृति के जरिये बिहार की चिंता सामने लाने की कोशिश
जय मानव चन्द्र ने बताया कि ने बताया भारत और बांग्लादेश के बीच फरक्का समझौते से बिहार को हुए कथित नुकसान को देखते हुए इस बार फरक्का बैराज की थीम चुनी गई है। गंगा नदी में गाद जमा होने, बाढ़ और कटाव जैसी समस्याओं से बिहार की बड़ी आबादी प्रभावित होती है। पंडाल के जरिये केंद्र सरकार का ध्यान इस मुद्दे की ओर आकर्षित करने और बिहार के हितों को ध्यान में रखकर उचित समझौते की मांग उठाने का प्रयास किया जा रहा है।

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फरक्का जलसंधि से बिहार को नुकसान का क्या है मुद्दा?
फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बना है। इसका निर्माण हुगली नदी में पानी के प्रवाह को बढ़ाने और कोलकाता बंदरगाह की नौवहन क्षमता बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर 1996 में 30 साल की जलसंधि हुई थी। हालांकि, बिहार में बाढ़, गाद जमाव और नदी कटाव की समस्याओं को फरक्का बैराज और जल प्रबंधन से जोड़कर लंबे समय से सवाल उठाए जाते रहे हैं। इन समस्याओं के कारणों पर नदी के प्रवाह, गाद के प्राकृतिक जमाव, तटबंधों और अन्य जल प्रबंधन संबंधी पहलुओं का भी अध्ययन जरूरी है। समिति की मांग है कि केंद्र सरकार फरक्का से जुड़े समझौतों और जल प्रबंधन के मामलों पर बिहार के हितों को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से विचार करे।

कलश स्थापना के साथ पूजा शुरू, तीन दिन बंटेगा महाप्रसाद
अध्यक्ष कुमार पंकज ने बताया कि मां दुर्गा की पूजा विधि-विधान के साथ शुरू हो गई है। पहले दिन कलश स्थापना कर मां की आराधना की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस वर्ष मां का आगमन हाथी पर और विदाई मुर्गे पर हो रही है। दस दिवसीय पूजा उत्सव के दौरान सप्तमी, अष्टमी और नवमी को महाप्रसाद का वितरण किया जाएगा। महासप्तमी पर मूंग दाल का हलवा, महाष्टमी पर खीर और महानवमी पर खिचड़ी का प्रसाद बांटा जाएगा। नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ मां को 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। समिति को उम्मीद है कि फरक्का बैराज की थीम श्रद्धालुओं को आकर्षित करने के साथ बिहार से जुड़े इस मुद्दे पर चर्चा का अवसर भी देगी।

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