कभी केसी त्यागी, ललन सिंह और सीएम नीतीश कुमार हर फैसले साथ लिया करते थे।
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जनता दल यूनाईटेड (JDU) में सचमुच बदलाव की बयार चल रही है। उपेंद्र कुशवाहा को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू में एंट्री के समय जदयू संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष बनाया था। कुशवाहा के जदयू छोड़ने की एक वजह यह भी थी कि राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद ललन सिंह ने संसदीय बोर्ड अध्यक्ष जैसे किसी पद को ही कुछ दिनों पहले नकार दिया था। अब एक और पद नकारा गया है- राष्ट्रीय प्रधान महासचिव। यह पद अबतक नीतीश कुमार के पुराने साथी और दिल्ली में जदयू को जमाए रखने वाले केसी त्यागी, यानी किशन चंद त्यागी के पास था।
जदयू में मंगनी लाल मंडल को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष औरक रामनाथ ठाकुर को महासचिव का पद दिया गया है। मंडल को महासचिवों की सूची में पहले स्थान पर रखा गया है और उनका नाम बोल्ड अक्षरों में है, मतलब उन्हें प्रधान महासचिव कहा जा सकता है। बिहार सरकार के मंत्री संजय झा को भी महासचिव बनाया गया है और विवादित बयानों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए किरकिरी बनने वाले गुलाम रसूल बलियावी को भी इसी पद पर रखा गया है।