कुर्जी इलाके को बंद करवाते नीलेश मुखिया के समर्थक।
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23 दिनों की आशंका अब जमीन पर दिख रही 31 जुलाई को जब अपने कार्यालय के पास कार में नीलेश मुखिया को गोली मारी गई, तभी से पटना पुलिस सहमी हुई थी कि हंगामा बड़ा न हो जाए। पाटलिपुत्र के रूबन मेमोरियल हॉस्पिटल में इलाज हो रहा था, लेकिन वहां भी अस्पताल प्रबंधन सहमा हुआ था कि यहां कुछ हुआ तो तोड़फोड़ हो सकती है। अस्पताल ने हालत बताते हुए परिजनों को समझाया और एयर एम्बुलेंस से नीलेश को दिल्ली भेज दिया गया। बुधवार को जैसे ही दिल्ली से खबर निकली कि
नीलेश मुखिया की मौत हो गई है, समर्थकों में आक्रोश व्याप्त हो गया। समर्थकों ने स्थानीय सभी छोटी-बड़ी दुकानों को जबरन बंद करवा दिया। यहां तक कि फुटकर दुकान से लेकर बड़े-बड़े मॉल तक को भी समर्थकों ने जबरन बंद करवा दिया। शाम चार बजे कुर्जी क्षेत्र की सभी दुकानें बंद हो चुकी हैं। समर्थकों ने पेट्रोल पंप भी बंद करवा दिया है। फिलहाल स्थिति काफी तनावपूर्ण है।
तनाव को देखते हुए कुर्जी इलाके में पुलिस की तैनाती कर दी गई है।
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तोड़फोड़ नहीं, लोग खुद भी बंद करने लगे दुकान
नीलेश मुखिया की मौत की खबर से हंगामे की आशंका को देखते हुए भारी तादाद में पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंच चुकी है। स्थानीय थाना की पुलिस सहित अन्य थाने की पुलिस भी इस क्षेत्र में पहुंचकर गश्ती कर रही है। पुलिस की मौजूदगी में ही नीलेश मुखिया के सैकड़ों समर्थक "नीलेश मुखिया अमर रहे" के नारे के साथ दुकानें बंद करवा चुके हैं। समर्थकों की भीड़ में शामिल समर ठाकुर ने कहा कि सारी दुकानें बंद अपने आप बंद होने लगीं। कुछ दुकानें खुली थीं तो मुखियाजी के समर्थकों ने बंद करा दिया। हम मेडिकल दुकानदारों को बंद करने से रोक रहे हैं। दुकान बंद करवाने के क्रम में समर्थक कहीं तोड़फोड़ नहीं कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने भी इस बंद का समर्थन किया है।