केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बिहार इन्वेस्टर मीट में राज्य की सड़क परियोजनाओं को लेकर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में करीब 68 हजार करोड़ रुपये की लागत के सड़क निर्माण कार्य पूरे किए जा चुके हैं। वहीं, करीब 65,100 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर काम चल रहा है, जबकि करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं।
गडकरी ने बताया कि वर्ष 2014 में बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई करीब 4,615 किलोमीटर थी, जो अब बढ़कर लगभग 6,500 किलोमीटर हो गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में 2,910 किलोमीटर लंबी सड़क परियोजनाएं करीब 31 हजार करोड़ रुपये की लागत से पूरी की जा चुकी हैं।
गंगा पर कई बड़े पुल और सड़क परियोजनाएं
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में सड़क कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने गंगा पर पुलों के निर्माण और नई कनेक्टिविटी परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में सड़क नेटवर्क का लगातार विस्तार हो रहा है। गडकरी ने करीब 440 किलोमीटर लंबे राम-जानकी मार्ग का उल्लेख किया। इस परियोजना की लागत 5,044 करोड़ रुपये है और इसका करीब 87 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि करीब 1,600 किलोमीटर लंबे बौद्ध सर्किट मार्ग पर भी काम चल रहा है। इस परियोजना की लागत करीब 22 हजार करोड़ रुपये है। इसके करीब 90 फीसदी काम पूरा होने का दावा किया गया है। परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे पर खर्च होंगे 72 हजार करोड़
गडकरी ने गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे कॉरिडोर को बिहार के लिए महत्वपूर्ण परियोजना बताया। उन्होंने कहा कि करीब 536 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की लागत लगभग 72 हजार करोड़ रुपये है। इसमें करीब 400 किलोमीटर हिस्सा बिहार से होकर गुजरेगा, जिस पर लगभग 52 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए बिहार के सात जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से जुड़ी घोषणा जारी की गई है।
पढ़ें: 48 गांवों में बाढ़ का असर, 24000+ प्रभावित; 33 नाव और बोट एंबुलेंस तैनात, 14 रसोइयों में बन रहे भोजन
रक्सौल-हल्दिया कॉरिडोर से 20 घंटे का सफर आठ घंटे में
गडकरी ने रक्सौल-हल्दिया छह लेन ग्रीनफील्ड हाईवे का भी जिक्र किया। करीब 550 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत लगभग 45,200 करोड़ रुपये है। इसमें करीब 400 किलोमीटर हिस्सा बिहार में होगा, जिस पर लगभग 26 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) का काम दिसंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। इस कॉरिडोर के बनने से रक्सौल से हल्दिया तक की यात्रा में लगने वाला समय करीब 20 घंटे से घटकर आठ घंटे रह जाएगा। यह कॉरिडोर पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय और मुंगेर समेत बिहार के कई हिस्सों से होकर गुजरेगा।
वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर का 35 फीसदी काम पूरा
केंद्रीय मंत्री ने वाराणसी-रांची-कोलकाता कॉरिडोर को भी प्रमुख सड़क परियोजनाओं में शामिल बताया। करीब 600 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर की लागत लगभग 32 हजार करोड़ रुपये है। गडकरी के अनुसार, परियोजना का करीब 35 फीसदी काम पूरा हो चुका है और इसे जुलाई 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस परियोजना के तहत बिहार में करीब 144 किलोमीटर सड़क का निर्माण होना है, जिसकी लागत लगभग 13,500 करोड़ रुपये बताई गई है। बिहार में इसके करीब 25 फीसदी काम पूरा होने की जानकारी दी गई। गडकरी ने कहा कि कॉरिडोर के पूरा होने से बिहार के साथ उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। उन्होंने दावा किया कि इससे वाराणसी से कोलकाता की यात्रा का समय 18 घंटे से घटकर करीब पांच घंटे रह जाएगा।
पटना के आसपास कनेक्टिविटी और जाम कम करने पर जोर
गडकरी ने पटना से जुड़ी प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं का भी ब्योरा दिया। उन्होंने बताया कि करीब 162 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की लागत 10,200 करोड़ रुपये है। इसका करीब 22 फीसदी काम पूरा हो चुका है और दिसंबर 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से पटना के आसपास के कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। इससे शहर में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, प्रदूषण और जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
पटना-हाजीपुर परियोजना को भी मंजूरी
गडकरी ने पटना-हाजीपुर से जुड़ी एक अन्य परियोजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने करीब 1.4 किलोमीटर लंबी परियोजना के लिए 8,500 करोड़ रुपये की लागत और मंजूरी मिलने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बिहार में सड़क और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की योजना है।
जमीन के विकास से सड़क परियोजनाओं की फंडिंग का सुझाव
बिहार इन्वेस्टर मीट में गडकरी ने सड़क परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए जमीन के बेहतर इस्तेमाल का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि सरकार, रोड कॉरपोरेशन या शहरी विकास से जुड़ी एजेंसियों को जमीन के विकास का अधिकार देकर 60-40 के फॉर्मूले पर काम किया जा सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि विकसित जमीन का एक हिस्सा जमीन मालिक को और एक हिस्सा सरकार को दिया जाए, जबकि शेष हिस्से से परियोजना की लागत पूरी की जाए। उनके अनुसार, इस मॉडल के जरिए बिना अतिरिक्त सरकारी धन खर्च किए 50 से 60 हजार करोड़ रुपये तक का निवेश जुटाया जा सकता है।