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नवरात्र: 51 शक्तिपीठों में शामिल है बड़ी पटन देवी मंदिर, लाखों श्रद्धालु आते हैं दर्शन करने; जानिए खास बातें

Mon, 12 Oct 2026 09:34 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Shardiya Navratri 2026: पटना सिटी स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र है। नवरात्र के दौरान इस शक्तिपीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। यहां के तीन स्वरूपों की पूजा की जाती है। आज इस खास दिन में 'अमर उजाला' आपको बिहार के शक्ति पीठ के बारे में बता रहा है। आइए जानते हैं...
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पटन देवी शक्ति पीठ। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज शारदीय नवरात्र का दूसरा दिन है। आज मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप माता ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। सनातन में नवरात्रि विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है, जिसे शक्ति की देवी दुर्गा की उपासना के रूप में मनाया जाता है। शारदीय नवरात्र में पटना सिटी स्थित पटन देवी शक्ति पीठ में पूजा का खास महत्व है। यहां तीन महादेवियों की पूजा की जाती है। नवरात्र के अवसर पर यहां दूर-दूर से लाखों श्रद्धालु पटन देवी माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यह एक पौराणिक और ऐतिहासिक मंदिर है। मान्यता है कि यहां माता सती की दायी जांघ गिरी थी। इसी कारण यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां मां भगवती के तीन रूपों महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की पूजा की जाती है।

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माता सती से जुड़ी है शक्तिपीठ की मान्यता
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा दक्ष प्रजापति ने एक यज्ञ का आयोजन किया था। इस दौरान उन्होंने भगवान शिव का अपमान किया, जिससे आहत होकर माता सती ने यज्ञ की अग्नि में अपने प्राण त्याग दिए। पत्नी की मृत्यु से दुखी भगवान शिव उनके पार्थिव शरीर को लेकर तांडव करने लगे। मान्यता है कि सृष्टि को इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंडित कर दिया। माता सती के शरीर के अंग अलग-अलग स्थानों पर गिरे और उन स्थानों को शक्तिपीठ के रूप में मान्यता मिली। मान्यता है कि पटना सिटी स्थित बड़ी पटन देवी मंदिर वाले स्थान पर माता सती की दायीं जांघ गिरी थी। इसी वजह से इसे 51 शक्तिपीठों में शामिल माना जाता है। इसलिए विशेष धार्मिक महत्व है।
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तीन देवियों की प्रतिमाएं हैं मंदिर की खास पहचान
मंदिर के महंत विजय शंकर गिरी ने बताया कि बड़ी पटन देवी मंदिर में काले पत्थर से बनी महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इतिहासकार इन तीन प्रतिमाओं को अति प्राचीन बताते हैं। महंत ने बताया कि माता को नगर का रक्षक भी कहा जाता है। मान्यता है कि आधी रात को माता नगर भ्रमण करने निकलती है। नवरात्र के दौरान विशेष रूप से पूजा की जाती है। मंदिर से जुड़ी मान्यताओं में योनि कुंड का भी उल्लेख मिलता है। श्रद्धालुओं के बीच ऐसी मान्यता है कि इस कुंड में हवन सामग्री डालने पर वह पाताल तक पहुंच जाती है। यह विश्वास मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है।
 

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बड़ी पटन देवी मंदिर, पटना - फोटो : Instagram
यहां दो विधियों से होती है पूजा
मंदिर में देवी को दिन के समय कच्ची और रात में पक्की भोजन सामग्री का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान यहां वैदिक विधि से सार्वजनिक पूजा-अर्चना होती है। इसके अलावा रात में कुछ समय के लिए तांत्रिक पूजा भी की जाती है। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं। महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, मंदिर को कालिका मंत्र की सिद्धि से जुड़ी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। नवरात्र के दिनों में इन धार्मिक अनुष्ठानों के कारण मंदिर में विशेष चहल-पहल रहती है। 

मंदिर में माता की पूजा और आरती के लिए खास समय निर्धारित
सामान्य दिनों में मंदिर में माता की पूजा सुबह पांच बजे से शुरू हो जाती है। इसके बाद साढ़े पांच बजे मंगला आरती की जाती है। इसके बाद भव्य श्रृंगार होता है। इसके बाद कपाट भक्तों के लिए खोल दिया जाता है। मंगलवार और शनिवार को सामान्य दिनों में काफी भीड़ उमड़ती है। दशहरा के दौरान खासकर अष्टमी और नवमी को रात 12 बजे से माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं लाइन में लग जाते हैं। 

मंदिर के जीर्णोद्धार का भी हुआ है काम
बड़ी पटन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ इसके संरक्षण और विकास पर भी ध्यान दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में तीनों देवियों की प्रतिमाओं की स्थापना और मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार की ओर आठ करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। इसके तहत मंदिर परिसर के विकास और निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर का जीर्णोद्धार पांच साल में भी पूरा नहीं होता है। इस लोगों में काफी आक्रोश है। महंत विजय शंकर गिरि ने बताया कि निर्माण कार्य तय समय पर पूजा नहीं हो पाया है। अब तो काम भी बंद कर दिया गया है। महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल्द से जल्द मंदिर के जीर्णोद्धार का काम पूरा करने का आश्वासन दिया है। 
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