बड़ी पटन देवी मंदिर, पटना
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यहां दो विधियों से होती है पूजा
मंदिर में देवी को दिन के समय कच्ची और रात में पक्की भोजन सामग्री का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है। नवरात्र और दुर्गा पूजा के दौरान यहां वैदिक विधि से सार्वजनिक पूजा-अर्चना होती है। इसके अलावा रात में कुछ समय के लिए तांत्रिक पूजा भी की जाती है। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं। महंत विजय शंकर गिरी के अनुसार, मंदिर को कालिका मंत्र की सिद्धि से जुड़ी परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। नवरात्र के दिनों में इन धार्मिक अनुष्ठानों के कारण मंदिर में विशेष चहल-पहल रहती है।
मंदिर में माता की पूजा और आरती के लिए खास समय निर्धारित
सामान्य दिनों में मंदिर में माता की पूजा सुबह पांच बजे से शुरू हो जाती है। इसके बाद साढ़े पांच बजे मंगला आरती की जाती है। इसके बाद भव्य श्रृंगार होता है। इसके बाद कपाट भक्तों के लिए खोल दिया जाता है। मंगलवार और शनिवार को सामान्य दिनों में काफी भीड़ उमड़ती है। दशहरा के दौरान खासकर अष्टमी और नवमी को रात 12 बजे से माता के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं लाइन में लग जाते हैं।
मंदिर के जीर्णोद्धार का भी हुआ है काम
बड़ी पटन देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ इसके संरक्षण और विकास पर भी ध्यान दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मंदिर के गर्भगृह में तीनों देवियों की प्रतिमाओं की स्थापना और मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार की ओर आठ करोड़ रुपये की राशि दी गई थी। इसके तहत मंदिर परिसर के विकास और निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि मंदिर का जीर्णोद्धार पांच साल में भी पूरा नहीं होता है। इस लोगों में काफी आक्रोश है। महंत विजय शंकर गिरि ने बताया कि निर्माण कार्य तय समय पर पूजा नहीं हो पाया है। अब तो काम भी बंद कर दिया गया है। महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल्द से जल्द मंदिर के जीर्णोद्धार का काम पूरा करने का आश्वासन दिया है।