मुजफ्फरपुर के कटरा प्रखंड के बसघट्टा क्षेत्र में फॉल्स डैम के टूटने से सैकड़ों एकड़ खेतों में पानी भर गया है। इससे हुई बर्बादी से किसानों में गहरी मायूसी छा गई है। इस घटना में करीब 80 एकड़ खेतों में लगी गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। पहले से ही कर्ज और प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे किसानों पर यह एक और बड़ा संकट बनकर टूटा है।
फसल बर्बाद, किसानों की बढ़ी मुश्किलें
स्थानीय किसानों के अनुसार, इस साल खेती के लिए उन्होंने महाजन से कर्ज लिया था। लेकिन फॉल्स डैम टूटने से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया। हाल ही में हुई बाढ़ से प्रभावित होने के बाद किसान किसी तरह से उबरने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन अब ठंड में बाढ़ जैसे हालात ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। बसघट्टा के भवानीपुर नवादा और आसपास के क्षेत्रों में पानी का फैलाव ज्यादा हुआ है। रबी की फसल, खासकर गेहूं बुरी तरह प्रभावित हुई है।
खनन माफिया और फॉल्स डैम का संकट
किसानों ने इस संकट के लिए मिट्टी खनन करने वाले माफियाओं को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि इन माफियाओं ने अवैध खनन के चलते नदी किनारे कमजोर फॉल्स डैम बनाया था, जो अब टूट गया है। किसानों ने पहले भी इस समस्या को प्रशासन के सामने उठाया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक किसान ने बताया कि हमने प्रशासन को कई बार अवगत कराया कि खनन माफिया के कारण फॉल्स डैम कमजोर हो गया है। अब हमारी गेहूं की फसल डूब गई है। हमारा कर्ज कैसे चुकता होगा, यह सोचकर डर लग रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और राहत की कवायद
कटरा प्रखंड के अंचल अधिकारी ने बताया कि किसानों से फसल डूबने की जानकारी मिली है। डैम के टूटने से नदी का पानी खेतों में भर गया है।
जलभराव को रोकने और पानी निकालने के लिए लघु सिंचाई और जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि हम पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं। प्रभावित किसानों की क्षति का आकलन किया जाएगा और नियमानुसार राहत प्रदान की जाएगी।
ठोस कार्रवाई और राहत पैकेज की मांग
घटनास्थल पर मौजूद किसानों ने प्रशासन से जल्द मुआवजे और स्थायी समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि अगर अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह समस्या बार-बार सामने आएगी।
स्थानीय लोग जल निकासी की तेज प्रक्रिया और क्षतिपूर्ति के लिए राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं।