राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक मोहन भागवत अपने दो दिवसीय प्रवास पर मुजफ्फरपुर पहुंचे। उन्होंने गणतंत्र दिवस के मौके पर कलमबाग चौक स्थित उत्तर बिहार प्रांत कार्यालय मधुकर निकेतन में झंडा फहराया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने उत्तर बिहार के विभिन्न स्तर के संघ चालकों के साथ बैठक कर बौद्धिक मार्गदर्शन दिया।
सरहद के भीतर की चुनौतियों पर आत्ममंथन का आह्वान
अपने संबोधन में सरसंघचालक ने कहा कि सरहद पर शहीद होने वाला हर वीर भारतवासी होता है, लेकिन सरहद के भीतर होने वाली हिंसा और आपसी टकराव पर भी समाज को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस आपसी वैमनस्य को छोड़कर प्रेम और सद्भाव के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है।
सद्भाव से ही आती है समृद्धि और शांति
मोहन भागवत ने कहा कि जहां आपसी झगड़े और तनाव नहीं होते, वहां समृद्धि और सुख-शांति स्वतः आती है। उन्होंने संविधान की चर्चा करते हुए कहा कि संविधान नागरिकों को केवल अधिकार ही नहीं, बल्कि कर्तव्यों का भी बोध कराता है। यह संस्कार आने वाली पीढ़ियों और बच्चों तक पहुंचाना जरूरी है, क्योंकि संविधान हमारे आचरण की दिशा तय करता है।
कानून पालन और संवैधानिक मार्ग की बात
सरसंघचालक ने कहा कि नियम और कानून का पालन सभी नागरिकों का कर्तव्य है। यदि कोई कानून उचित नहीं लगता, तो उसे संवैधानिक तरीके से बदलने का प्रयास किया जाना चाहिए, लेकिन जब तक कानून अस्तित्व में है, तब तक उसका पालन आवश्यक है।
पढ़ें- Bihar: UGC के नए नियमों से नाराज युवक पर पीएम को अपशब्द कहने का आरोप, आपत्तिजनक वीडियो की जांच में जुटी पुलिस
राष्ट्रीय ध्वज और धर्म की भूमिका पर विचार
उन्होंने तिरंगे के रंगों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ध्वज का भगवा रंग त्याग और संस्कृति का प्रतीक है, सफेद रंग शांति का और धर्मचक्र निरंतर गतिशीलता व धर्म का संकेत देता है। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माताओं ने धर्म को आवश्यक मानते हुए उसे सामाजिक जीवन से जोड़ा है।
मोहन भागवत ने कहा कि बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने भी अपने भाषणों में धर्म और संविधान के संबंध पर विस्तार से चर्चा की थी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ नियम लिखित नहीं होते, बल्कि परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी चलते हैं, जो अनुशासन और नैतिकता सिखाते हैं, जैसे बड़ों का सम्मान और सामाजिक मर्यादाओं का पालन। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संघ के कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे। सरसंघचालक ने सभी से आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।