मुजफ्फरपुर के राघव झुनझुनवाला ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में देशभर में चौथा स्थान प्राप्त कर पूरे बिहार और अपने जिले का मान बढ़ाया है। उनके इस शानदार परिणाम के बाद परिवार, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। राघव के पिता स्वर्गीय नवीन झुनझुनवाला और माता अंजू झुनझुनवाला हैं। वह अपने परिवार के इकलौते बेटे हैं।
तीसरे प्रयास में मिली बड़ी सफलता
देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा में राघव झुनझुनवाला ने अपने तीसरे प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल की है। चौथा रैंक लाकर उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार में जश्न का माहौल है। राघव का कहना है कि कठिन परिश्रम और लक्ष्य के प्रति दृढ़ विश्वास ने उन्हें इस कठिन परीक्षा में सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुजफ्फरपुर से शुरू हुई शिक्षा की यात्रा
राघव झुनझुनवाला बताते हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा मुजफ्फरपुर के एक निजी स्कूल से हुई। उन्होंने दसवीं और बारहवीं की परीक्षा में भी अपने स्कूल में टॉप किया। राघव के अनुसार बचपन से ही उन्होंने इस कठिन परीक्षा को पास करने और उसमें बैठने का संकल्प लिया था।
स्कूल से लेकर इंटरमीडिएट तक शानदार प्रदर्शन
उन्होंने दसवीं की परीक्षा 10 सीजीपीए के साथ पास की। इसके बाद बारहवीं की परीक्षा अर्थशास्त्र संकाय से 97.5 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की और बिहार में टॉपर भी रहे। इसके बाद अपने सपनों को साकार करने के लिए वह राजधानी दिल्ली चले गए।
दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज से की पढ़ाई
दिल्ली पहुंचने के बाद राघव ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और 9.35 सीजीपीए हासिल की।
परिवार और शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
राघव झुनझुनवाला अपनी सफलता का श्रेय अपनी माता, दादा, स्कूल के शिक्षकों और अपने मामा को देते हैं। उनका कहना है कि इन सभी ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें प्रेरित किया, जिसकी वजह से वह अपने लक्ष्य के प्रति लगातार अडिग रहे।
पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटा हौसला
राघव ने बताया कि पिता के निधन के बाद उनकी मां, दादा और मामा ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया और हर कदम पर साथ दिया। यही कारण रहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
पहले प्रयास में प्रीलिम्स पास, दूसरे में इंटरव्यू तक पहुंचे
उन्होंने बताया कि अपने पहले प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स परीक्षा पास की, लेकिन मेन्स में सफलता नहीं मिल सकी। दूसरे प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो पाया। इसके बाद तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया चौथा रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया।