बिहार के मुजफ्फरपुर में फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड एजाज कमर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। नगर थाना क्षेत्र के कन्हाई कम्युनिकेशन पर बीते बुधवार को हुई छापेमारी के बाद इस गिरोह का खुलासा हुआ था। मामले में अब तक चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। इनमें साहिल कुमार, शिव कुमार पंडित और सुजीत कुमार को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। अब पुलिस ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड एजाज कमर को भी मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किया है।
इस मामले में सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि एजाज कमर की गिरफ्तारी के बाद उसकी ट्रैवल हिस्ट्री खंगाली जा रही है। अब तक की जांच में उसके ब्रिटेन के लंदन में रहने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, उसके परिवार के कुछ सदस्य भी लंदन में रहते हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट बनाने वाले इस गिरोह का कोई अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन तो नहीं है।
नगर थाना पुलिस की अब तक की जांच के अनुसार, आरोपी वर्ष 2020 से आधार से जुड़े काम में सक्रिय थे। उन्हें एक थर्ड पार्टी कंपनी के माध्यम से आधार से संबंधित मानव संसाधन का काम मिला था। हालांकि, उसी समय से फर्जी आधार कार्ड बनाने का काम शुरू हुआ था या बाद में, इसकी जांच की जा रही है।
पुलिस की जांच में अब तक एक ऐसा पासपोर्ट सामने आया है, जो बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद बेलाल होसन के नाम पर जारी होने की जानकारी मिली है। पुलिस ने संबंधित पासपोर्ट जब्त कर लिया है। गिरोह ने अब तक कितने फर्जी पासपोर्ट तैयार किए और किन-किन लोगों के लिए दस्तावेज बनाए, इसका खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
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बीते दिनों नगर थाना पुलिस ने कन्हाई कम्युनिकेशन पर छापेमारी कर डेल कंपनी का लैपटॉप, आधार एनरोलमेंट सॉफ्टवेयर, यूआईडीएआई की मशीन, फिंगरप्रिंट और आई स्कैनर, अंगूठे के क्लोन और आठ मूल आधार कार्ड बरामद किए थे। साहिल के मोबाइल और ई-मेल की जांच में बांग्लादेशी नागरिक के नाम से बने पासपोर्ट से जुड़ा रिकॉर्ड भी मिला था। इसके अलावा, पुलिस ने एक सरकारी कॉलेज के पास स्थित ओम कम्युनिकेशन से भी लैपटॉप बरामद किया था। वहीं, कलमबाग चौक स्थित साहिल के किराए के कमरे की भी तलाशी ली गई थी।
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया था कि आरोपी शिव कुमार पंडित पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित यूनियन बैंक में आधार ऑपरेटर के रूप में काम करता था। पुलिस के अनुसार, वह सुजीत कुमार के कहने पर सप्ताह में दो से तीन बार बैंक से यूआईडीएआई की मशीन बाहर निकालकर साइबर कैफे संचालकों को देता था। इसी मशीन की मदद से आधार कार्ड में नाम-पता सुधारने, मोबाइल नंबर जोड़ने और पासपोर्ट आवेदन से जुड़े काम किए जाते थे।
सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी ने बताया कि अब तक चार लोगों की भूमिका सामने आई है। पुलिस एजाज कमर समेत अन्य आरोपियों के संपर्कों, दूसरे राज्यों में फैले नेटवर्क और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह ने अब तक कितने फर्जी आधार कार्ड और पासपोर्ट तैयार किए हैं। मामले में आगे की जांच जारी है।