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Bihar: 16 प्लॉट, लाखों का निवेश और ट्रस्ट का जाल, अफसर के काले धन का खेल बेनकाब

Tue, 31 Mar 2026 10:04 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर

सार

Bihar: ईओयू की छापेमारी में डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार के कई ठिकानों से 16 प्लॉट, करोड़ों के निवेश, लग्जरी कारों के दस्तावेज और चैरिटेबल ट्रस्ट के जरिए संचालित आईटीआई कॉलेज से जुड़े अहम सबूत मिले हैं।  
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आरोपी अफसर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में आय से अधिक संपत्ति के मामले में डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने सहरसा जिले में तैनात और मुजफ्फरपुर निवासी वैभव कुमार के छह ठिकानों पर छापेमारी की।

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निवेश के सबूत बरामद
छापेमारी के दौरान मनियारी थाना क्षेत्र स्थित पैतृक आवास, आईटीआई कॉलेज और अन्य स्थानों की तलाशी ली गई। इस दौरान टीम को 16 भूमि से जुड़े कागजात मिले, साथ ही LIC, SBI लाइफ और NPS में लाखों रुपये के निवेश से संबंधित दस्तावेज भी बरामद हुए। फिलहाल टीम इन निवेशों की विस्तृत जांच कर रही है।

EOU ने खोली अफसर की पोल
जांच में यह भी सामने आया है कि वैभव कुमार ने अपने और अपनी पत्नी के बैंक खातों में लगभग 20 लाख रुपये से अधिक राशि जमा कराई है। इसके अलावा उन्होंने अपनी पत्नी, पुत्र और पिता के नाम पर कुल 16 प्लॉट खरीदे हैं, जो मुजफ्फरपुर और पटना में स्थित करोड़ों रुपये के व्यावसायिक और आवासीय भूखंड हैं। छापेमारी के दौरान दो लग्जरी कारों के कागजात भी मिले हैं। एक लॉकर की भी पहचान हुई है, जिसकी तलाशी जल्द ली जाएगी।

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कॉलेज के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च
EOU टीम ने आईटीआई कॉलेज की भी जांच की है। जांच में पता चला कि कॉलेज के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। इसके लिए एक चैरिटेबल ट्रस्ट बनाया गया है और उसी के माध्यम से आईटीआई कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। EOU के अनुसार, वैभव कुमार के खिलाफ 2.41 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। जांच में यह भी सामने आया है कि सरकारी सेवा में आने के बाद उन्होंने अपनी ज्ञात आय से 78.03 प्रतिशत अधिक अवैध संपत्ति अर्जित की है।

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2013 में बीपीएससी के माध्यम से हुई थी नियुक्ती
बताया जाता है कि वैभव कुमार वर्ष 2013 में बीपीएससी के माध्यम से ग्रामीण विकास पदाधिकारी के रूप में नियुक्त हुए थे। इससे पहले वे वर्ष 2008 से 2013 तक एसबीआई में कार्यरत थे। फिलहाल टीम उनके एसबीआई खाते और लॉकर से जुड़ी जानकारी भी जुटा रही है। इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

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