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Satta Ka Sangram: मोतिहारी के युवा बोले- रोजगार महत्वपूर्ण मुद्दा; वैकेंसी कम हुईं, एग्जाम समय पर नहीं हो रहे

Sun, 12 May 2024 01:44 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्वी चंपारण

सार

Lok Sabha 2024: अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ रविवार को पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र पहुंचा। यहां अमर उजाला ने सुबह चाय पर चर्चा की। अब दोपहर में मतदाताओं के मुद्दों पर युवाओं से चर्चा की जा रही है। पढ़ें पूरी खबर...।
 
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पूर्वी चंपारण में युवाओं से चर्चा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला का चुनावी रथ 'सत्ता का संग्राम' रविवार को बिहार के पूर्वी चंपारण लोकसभा क्षेत्र में पहुंचा। यहां सुबह चाय पर चर्चा में आम मतदाताओं के मुद्दे जाने गए। वहीं, अब दोपहर में युवाओं से चर्चा में उनके मुद्दों पर चर्चा की जा रही है।

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पूर्वी चंपारण के गांधी मैदान में अमर उजाला से बात करते हुए अनूप कुमार ने बताया कि हम सरकारी भर्तियों के मद्देनजर क्वेश्चन पेपर तैयार कर अच्छी तैयारी करते हैं। इससे अच्छी प्रैक्टिस हो जाती है और एग्जाम पेपर को अच्छे से सॉल्व करके आते हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन वैकेंसी बहुत कम हो गईं हैं। वैकेंसी नहीं आने के कारण बहुत कम लोग तैयारी कर रहे हैं।



एक अन्य युवा कुनाल कुमार ने कहा कि तैयारी के मुताबिक आदमी को उतना अवसर नहीं मिल रहा है। सबसे बड़ी बात है कि वैकेंसी तो समय से आती है, लेकिन परीक्षा तो समय से होती नहीं है। हम लड़कों की आयु निकली जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार जो भी आए, वैकेंसी अच्छे से निकाले। जो सरकार अच्छी वैकेंसी देगी, उन्हीं का समर्थन करेंगे।  
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कुनाल ने आगे बताया कि हम लोग रेलवे की स्पेशल तैयारी करते हैं। रेलवे में पहले अच्छी-खासी वैकेंसी देखने को मिलती थी। अभी ऐसा है कि उसमें जितनी बढ़ोतरी होनी चाहिए, वह कम ही हो गई है। वहीं, जनसंख्या बढ़ने से दिन-प्रतिदिन युवा बेरोजगार ही होता जा रहा है।

रोशन कुमार ने बताया कि रेलवे के पहले सरकार पंचवर्षीय योजना के आधार पर पचास-साठ हजार वैकेंसी निकालती थी। बहाली देती थी और युवाओं की संख्या करोड़ों-लाखों में है। 80-90 लाख फॉर्म भरे जाते हैं। पांच-छह साल से एलपी टेक्नीशियन के लिए हम सोच रहे थे कि अब बहाली आएगी कि तब बहाली आएगी। चुनाव है तो सरकार बहाली देगी। लेकिन सरकार ने ऐसा किया पांच हजार कुछ बहाली दी एलपी टेक्नीशियन की। पहले पचास-साठ हजार वैकेंसी आती थी। युवाओं की तैयारी करते-करते नौकरी के लिए अप्लाई करने की उम्र खत्म हो गई। लेकिन सरकार सुन ही नहीं रही है।

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